अल्मोड़ा में नम आंखों से दी गई शहीद बीरेश्वर गोस्वामी को अंतिम विदाई

अल्मोड़ा: राजौरी जिले में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान शहीद हुए लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी का पार्थिव शरीर रविवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके गृह जनपद अल्मोड़ा लाया गया। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर पहुंचा, क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े।
सैन्य सम्मान के साथ अंतिम यात्रा
शहीद का पार्थिव शरीर पहले सेना के विशेष विमान से जम्मू से पंतनगर एयरपोर्ट लाया गया, जहां से हेलिकॉप्टर के जरिए अल्मोड़ा आर्मी हेलीपैड पहुंचाया गया। यहां सेना के अधिकारियों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर श्रद्धांजलि दी।
इसके बाद पार्थिव शरीर को उनके पांडेखोला स्थित आवास ले जाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। रास्ते भर नागरिकों ने पुष्प वर्षा कर “भारत माता की जय” और “शहीद बीरेश्वर गोस्वामी अमर रहें” के नारे लगाए।
परिवार और समाज ने दी अंतिम विदाई
घर पर परिजन, रिश्तेदार, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। तिरंगे में लिपटे बेटे को देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। हर आंख नम दिखाई दी।
इसके बाद अंतिम यात्रा विश्वनाथ घाट के लिए रवाना हुई, जहां पूरे सैन्य सम्मान और विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद के चाचा और बड़े भाई ने उन्हें मुखाग्नि दी। सेना ने शस्त्र झुकाकर अंतिम सलामी दी।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि
जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने शहीद के बलिदान को राष्ट्र के लिए अमूल्य बताते हुए कहा कि उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, अपर जिलाधिकारी और सैन्य अधिकारियों ने भी पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
इस मौके पर विधायक मनोज तिवारी, पूर्व विधायक रघुनाथ सिंह चौहान, बिट्टू कर्नाटक सहित कई जनप्रतिनिधि और सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
दो दिन बाद बनते कैप्टन
जानकारी के अनुसार लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी का सैन्य करियर बेहद उज्ज्वल था। वर्ष 2023 में सेना में शामिल होने के बाद 2024 में उन्हें कमीशन मिला था और वे जल्द ही कैप्टन पद पर पदोन्नत होने वाले थे। लेकिन इससे पहले ही वे देश सेवा में सर्वोच्च बलिदान दे गए।
मेधावी छात्र से शहीद तक का सफर
अल्मोड़ा के मूल निवासी बीरेश्वर बचपन से ही मेधावी थे। उन्होंने आर्मी स्कूल रानीखेत और सैनिक स्कूल घोड़ाखाल से शिक्षा प्राप्त की। ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय से स्नातक में वे सिल्वर मेडलिस्ट रहे।
एनडीए में चयन के साथ-साथ उन्हें कई अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में भी अवसर मिले, लेकिन उन्होंने सेना में जाकर देश सेवा को प्राथमिकता दी।
पूरे क्षेत्र में शोक की लहर
मात्र 25 वर्ष की आयु में शहादत की खबर से परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, कई विधायक, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.





















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.