मोहम्मद मोकिम का पत्र भाजपा की मानसिकता से प्रेरित: ओपीसीसी प्रमुख

पूर्व विधायक मोकिम को सोमवार को कांग्रेस पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। विवाद का केंद्र उनका वह पत्र रहा, जिसमें उन्होंने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की उम्र और राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाए थे।
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस समिति (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने मंगलवार को पीटीआई से कहा कि मोकिम का पत्र भाजपा की दृष्टिकोण को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि पत्र में उठाए गए मुद्दे वही हैं, जिन्हें भाजपा बार-बार उठाती रही है। दास ने इस बात पर भी जोर दिया कि पत्र को 14 दिसंबर को उसी दिन सार्वजनिक किया गया जब कांग्रेस की शीर्ष इकाई अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (AICC) दिल्ली में बड़ी रैली आयोजित कर रही थी।
दास ने कहा, "पत्र के समय और इसकी सामग्री पर गौर करें। इसे स्थानीय मीडिया से ज्यादा राष्ट्रीय मीडिया में फैलाया गया। ऐसे में संदेह करना लाजिमी है कि यह भाजपा के हितों के अनुरूप लिखा गया।"
पूर्व विधायक के पत्र की मंशा पर सवाल उठाते हुए दास ने कहा कि अगर कोई पार्टी में सुधार लाना चाहता है, तो पहले वह अपने पत्र का जवाब लेता है, उसे मीडिया में प्रकाशित करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मोकिम से स्पष्ट होता है कि उनका कांग्रेस में बने रहने का मन नहीं है।
ओपीसीसी अध्यक्ष ने बताया कि मोकिम को विधायक रहते हुए पार्टी ने सम्मान दिया। लेकिन उनके हालिया व्यवहार से कांग्रेस के प्रति प्रतिबद्धता की कमी दिखाई देती है। उन्होंने यह भी कहा कि मोकिम अल्पसंख्यक समुदाय से होने के कारण पीएसी के सदस्य थे और अपनी बात उस मंच पर रख सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं किया।
मोकिम के राहुल गांधी के नेतृत्व पर उठाए गए सवालों पर दास ने कहा, "राहुल गांधी ने पूरे देश में पदयात्रा कर लोगों को जागरूक किया। क्या अब कोई उनके मार्गदर्शन देने का दावा करेगा?" साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मोकिम ने पत्र में प्रियंका गांधी वाड्रा को ‘केंद्रीय, स्पष्ट और सक्रिय नेतृत्व’ देने की मांग भी की थी।
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