मुजफ्फरनगर: अधिवक्ता समीर हत्याकांड के चार आरोपियों पर दोष सिद्ध

मुजफ्फरनगर। शहर के अधिवक्ता समीर सैफी (28) के अपहरण और हत्या के मामले में अदालत ने चारों आरोपियों पर दोष सिद्ध कर दिया है। समीर सैफी 15 अक्टूबर 2019 की शाम लद्दावाला क्षेत्र से अचानक गायब हो गए थे। चार दिन बाद, 19 अक्टूबर को उनका शव भोपा रोड पर एक पेट्रोल पंप के पास बरामद हुआ था।
पुलिस जांच में पता चला कि यह हत्या लेन-देन के विवाद के कारण की गई थी। वादी अजहर की शिकायत पर बकरा मार्केट निवासी सोनू उर्फ रिजवान, सिंगोल अल्वी, शालू उर्फ अरबाज और भोपा के सीकरी निवासी दिनेश के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था। अभियोजन पक्ष ने अदालत में छह गवाह पेश किए। शनिवार को सुनवाई के दौरान आरोपियों पर दोष सिद्ध हुआ। सजा के संबंध में अगली सुनवाई छह अप्रैल को होगी।
मामले का खुलासा
पुलिस ने बताया कि समीर सैफी का आरोपियों के साथ लगभग 40 लाख रुपये का लेन-देन लंबित था। मृतक ने अपनी राशि की मांग की थी, लेकिन आरोपियों ने देने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने हत्या की योजना बनाई। आरोपियों ने समीर को शहर से कार में ले जाकर सीकरी फार्म में रस्सी से गला घोंटकर मार दिया और शव को मिट्टी में दबा दिया।
वारदात के दिन हुआ था चैंबर का उद्घाटन
बचाव पक्ष के वकील ने दावा किया कि समीर केवल व्यापारी थे, अधिवक्ता नहीं। इस पर अभियोजन ने कहा कि यह तथ्य सही है कि समीर पहले व्यापार भी करते थे, लेकिन हाल ही में उन्होंने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करवा कर अधिवक्ता के रूप में नियुक्ति प्राप्त की थी। वादी अजहर ने बयान दिया कि घटना के दिन ही समीर ने अपने कचहरी चैंबर का उद्घाटन किया था।
अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-तीन के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने मामले की सुनवाई पूरी की और दोषियों पर दोष सिद्ध किया। सजा के संबंध में अंतिम सुनवाई सोमवार को होगी।
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