देश के 1 लाख से ज्यादा स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे, सरकारी रिपोर्ट में खुलासा

HIGHLIGHTS
- UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट के अनुसार देश में 1,00,843 स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं।
- आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा 16,357 सिंगल-टीचर स्कूल हैं, जबकि झारखंड और महाराष्ट्र भी सूची में आगे हैं।
- मंत्रालय ने कहा कि शिक्षकों की भर्ती और तैनाती की जिम्मेदारी राज्यों की है, हालांकि स्थानीय स्तर पर शिक्षकों की कमी बनी हुई है।
नई दिल्ली। देशभर में एक लाख से अधिक स्कूल ऐसे हैं जो सिर्फ एक शिक्षक के सहारे संचालित हो रहे हैं। सरकारी रिपोर्ट में सामने आए इन आंकड़ों से शिक्षकों की तैनाती में बड़ी कमी का पता चलता है। हालांकि, देश का कुल छात्र-शिक्षक अनुपात राष्ट्रीय मानकों के अनुसार बना हुआ है।
UDISE+ के 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में सभी प्रकार के प्रबंधन वाले कुल 1,00,843 स्कूल ऐसे हैं, जहां केवल एक शिक्षक कार्यरत है। इनमें आंध्र प्रदेश सबसे ऊपर है, जहां 16,357 सिंगल-टीचर स्कूल हैं। यह देश के कुल ऐसे स्कूलों का 16 प्रतिशत से अधिक है।
आंध्र प्रदेश के बाद झारखंड में 9,827 और महाराष्ट्र में 9,269 ऐसे स्कूल हैं। इसके अलावा कर्नाटक में 8,042, उत्तर प्रदेश में 7,874, राजस्थान में 7,200 और पश्चिम बंगाल में 6,769 सिंगल-टीचर स्कूल हैं। इन सात राज्यों में देश के कुल सिंगल-टीचर स्कूलों का करीब 65 प्रतिशत हिस्सा है।
कई राज्यों में बनी हुई है शिक्षक की कमी
यह समस्या केवल आर्थिक रूप से कमजोर या दूरदराज के क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में देखने को मिल रही है। तेलंगाना में 4,793, तमिलनाडु में 3,957 और असम में 3,159 स्कूल ऐसे हैं जहां सिर्फ एक शिक्षक है।
वहीं हिमाचल प्रदेश में 3,128, उत्तराखंड में 2,655 और छत्तीसगढ़ में 2,461 सिंगल-टीचर स्कूल हैं। दूसरी ओर केरल में 67, नागालैंड में 35, सिक्किम में 31, लद्दाख में 28, दिल्ली में सात और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में एक ऐसे स्कूल की जानकारी सामने आई है।
मंत्रालय ने खाली पदों की जानकारी नहीं दी
ये आंकड़े शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने राज्यसभा में शिक्षकों के खाली पदों से जुड़े सवाल के जवाब में दिए। हालांकि सवाल सरकारी स्कूलों से संबंधित था, लेकिन सिंगल-टीचर स्कूलों के आंकड़ों में सभी तरह के प्रबंधन वाले स्कूलों को शामिल किया गया है।
मंत्रालय ने राज्यवार स्वीकृत पदों और खाली पदों की संख्या उपलब्ध नहीं कराई। मंत्रालय के अनुसार, शिक्षकों की भर्ती, सेवा शर्तों और नियुक्ति की जिम्मेदारी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन की होती है।
मेरिट आधारित भर्ती की सलाह
मंत्रालय ने बताया कि शिक्षकों के खाली पदों के पीछे रिटायरमेंट, इस्तीफा, नए पदों का सृजन, स्टाफ का पुनर्गठन और छात्र संख्या में बदलाव जैसे कारण शामिल हैं। इसमें ग्रामीण, आदिवासी और आकांक्षी जिलों की स्थिति भी शामिल है।
केंद्र सरकार ने राज्यों को सलाह दी है कि वे पारदर्शी और मेरिट आधारित भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से शिक्षकों के पद भरें। साथ ही शिक्षकों की जरूरत का आकलन करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करने को भी कहा गया है।
राष्ट्रीय छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखने के लिए समग्र शिक्षा योजना के तहत आर्थिक सहायता भी दी गई है। मंत्रालय के अनुसार, प्राथमिक स्तर पर छात्र-शिक्षक अनुपात 19, उच्च प्राथमिक स्तर पर 17, माध्यमिक स्तर पर 15 और उच्च माध्यमिक स्तर पर 23 है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तय मानकों के भीतर है।
हालांकि, सिंगल-टीचर स्कूलों के आंकड़े बताते हैं कि राष्ट्रीय औसत बेहतर होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर शिक्षकों की उपलब्धता में बड़ा अंतर बना हुआ है।
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