स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण से जुड़े मामले में अग्रिम जमानत दिए जाने के कुछ ही दिनों बाद, शिकायतकर्ता ने इस आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की है। यह अपील आशुतोष ब्रह्मचारी ने दाखिल की है, जिन्होंने उच्च न्यायालय के 25 मार्च के फैसले को चुनौती दी है।
आरोपों की गंभीरता पर उठाए सवाल
शिकायतकर्ता का कहना है कि उच्च न्यायालय ने स्वामी पर लगे गंभीर आरोपों पर पर्याप्त विचार नहीं किया। याचिका में यह भी बताया गया है कि स्वामी मामले के गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे जांच निष्पक्ष तरीके से प्रभावित हो सकती है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी को अग्रिम जमानत दी थी। न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि जांच पूरी तरह से स्वतंत्र और बाहरी दबाव से मुक्त होनी चाहिए। 27 फरवरी को उच्च न्यायालय ने सरस्वती की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए निर्देश दिया था कि नाबालिग बच्चों से जुड़े कथित यौन शोषण के मामले में सुनवाई पूरी होने तक उन्हें हिरासत में नहीं लिया जाएगा। अदालत ने सुनवाई के बाद अपना आदेश सुरक्षित रखा और दोनों आरोपियों को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया।
झूसी पुलिस स्टेशन में दर्ज मामला
यह मामला प्रयागराज के झूसी पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। प्राथमिकी यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत दर्ज की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया है कि स्वामी ने कई बच्चों और युवा शिष्यों के साथ कथित यौन शोषण किया।
गवाहों को प्रभावित करने की आशंका
शिकायतकर्ता ने याचिका में मुख्य चिंता यह जताई है कि स्वामी गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे जांच निष्पक्ष नहीं रह पाएगी। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से इस पहलू पर गंभीर विचार करने और न्याय सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.



















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.