जाति-धर्म की राजनीति से समाज में नफरत बढ़ी: मायावती

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन और रणनीति को तेज करने की कवायद शुरू कर दी है। पार्टी प्रमुख मायावती ने बुधवार को लखनऊ स्थित बसपा मुख्यालय में वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में संगठनात्मक कामकाज, आगामी चुनावी तैयारी और मौजूदा राजनीतिक हालात पर विस्तार से चर्चा हुई।
मायावती ने कहा कि हाल के दिनों में एसआईआर से जुड़े कार्यों के कारण पार्टी की कुछ गतिविधियां प्रभावित हुई थीं, जिन्हें अब प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। उन्होंने पदाधिकारियों को आगाह किया कि विरोधी दल बसपा को कमजोर करने के लिए लगातार साजिशें कर रहे हैं, ऐसे में संगठन को सतर्क और एकजुट रहने की जरूरत है।
बसपा प्रमुख ने केंद्र और राज्य सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि गरीबों, दलितों, शोषितों, वंचितों, मुसलमानों, अन्य अल्पसंख्यकों के साथ-साथ व्यापारियों और किसानों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चाहे वर्तमान सरकारें हों या पूर्ववर्ती, इन वर्गों की समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। मायावती ने कहा कि आज ज्यादातर सरकारें जनहित के मुद्दों को पीछे छोड़कर जाति और धर्म के आधार पर राजनीति कर रही हैं, जिससे समाज में वैमनस्य बढ़ रहा है और यह देश के लिए ठीक नहीं है।
संसद की कार्यवाही पर भी उठाए सवाल
मायावती ने संसद के मौजूदा सत्र को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि संसद में पक्ष और विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप में उलझे हुए हैं। उनका कहना था कि संसद की गरिमा बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है, लेकिन मौजूदा हालात दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि टैरिफ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर संसद में स्पष्ट चर्चा होनी चाहिए थी, मगर आपसी टकराव के कारण ऐसे अहम मुद्दे पीछे छूट गए हैं।
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