देश में प्लास्टिक रीसाइक्लिंग को बढ़ावा, युवाओं के लिए प्रशिक्षण केंद्र स्थापित

देश में प्लास्टिक रीसाइक्लिंग उद्योग को वैश्विक मानकों तक ले जाने और ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ की दिशा में मजबूती लाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। ऑल इंडिया प्लास्टिक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (AIPMA) के ‘अरविंद मेहता टेक्नोलॉजी एंड एंटरप्रेन्योरशिप सेंटर’ (AMTEC) ने ऑस्ट्रिया की रीसाइक्लिंग मशीनरी कंपनी EREMA के साथ साझेदारी करते हुए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस सहयोग के तहत मुंबई में एक अत्याधुनिक ‘रीसाइक्लिंग स्किल डेवलपमेंट सेंटर’ का निर्माण किया जाएगा। यह केंद्र देश में कुशल मानव संसाधन की कमी को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा और छात्रों को उद्योग की वास्तविक जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित करेगा।
गुरुवार को भारत मंडपम में आयोजित 12वीं अंतरराष्ट्रीय प्लास्ट इंडिया प्रदर्शनी 2026 के दौरान AIPMA गवर्निंग काउंसिल और AMTEC के चेयरमैन अरविंद मेहता ने बताया कि देश का रीसाइक्लिंग उद्योग फिलहाल कुशल और प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी से जूझ रहा है। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखते हुए, उन्हें वास्तविक मशीनों पर काम करने का अनुभव देना है। यह सेंटर एक ‘व्यवस्थित स्कूल’ की तरह काम करेगा, जहां स्क्रैप और कच्चे माल को प्रोसेस करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।”
इस पहल के तहत छात्रों को 75 घंटे का संरचित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा, EREMA ऑस्ट्रिया केंद्र को 50-100 किलो ग्राम प्रति घंटा क्षमता वाली अत्याधुनिक रीसाइक्लिंग मशीनें मुफ्त में उपलब्ध कराएगी, जिससे छात्र उद्योग के वास्तविक माहौल में ‘हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग’ प्राप्त कर सकेंगे। प्रशिक्षण के दौरान उन्नत रीसाइक्लिंग तकनीक, सतत विकास की प्रथाएं और ऑपरेशनल दक्षता पर जोर दिया जाएगा।
EREМА के प्रबंध निदेशक मार्कस ह्यूबर-लिंडिंगर ने कहा कि “बेहतरीन मशीनरी के सही इस्तेमाल के लिए कुशल और प्रशिक्षित दिमागों की जरूरत होती है। तकनीक तभी प्रभावी हो सकती है जब उसका संचालन जानकार लोग करें।”
AIPMA के अध्यक्ष सुनील शाह ने बताया कि प्रशिक्षण पूरा करने वाले छात्रों को प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे। साथ ही, कई कॉर्पोरेट डोनर्स CSR फंड के माध्यम से इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का समर्थन कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस पहल से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि युवाओं के लिए वैश्विक स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।
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