राष्ट्रपति मुर्मू के दौरे में प्रोटोकॉल उल्लंघन, केंद्र ने बंगाल सरकार से मांगा जवाब

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हालिया पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान प्रोटोकॉल नियमों के कथित उल्लंघन का मामला गर्माता जा रहा है। केंद्र सरकार ने राज्य प्रशासन से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और रविवार शाम पांच बजे तक जवाब देने का समय दिया है।
गृह मंत्रालय की कार्रवाई
केंद्रीय गृह सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर “ब्लू बुक” में उल्लिखित प्रोटोकॉल नियमों के संभावित उल्लंघन पर स्पष्टीकरण मांगा है। “ब्लू बुक” सुरक्षा और प्रोटोकॉल से जुड़ा एक गोपनीय दस्तावेज है, जो राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों की यात्रा में पालन किए जाने वाले नियमों का विवरण देता है।
राष्ट्रपति ने जताई चिंता
राष्ट्रपति मुर्मू ने शनिवार को बागडोगरा हवाई अड्डे के पास आदिवासी समुदाय के वार्षिक कार्यक्रम में कम उपस्थिति पर आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम स्थल को बिधाननगर से गोशाईपुर स्थानांतरित करने के फैसले पर सवाल उठाया और यह नोट किया कि राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके मंत्री इस दौरान उपस्थित नहीं थे।
प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोप
सूत्रों के अनुसार, केंद्र ने यह भी देखा कि राष्ट्रपति के आगमन पर मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक का स्वागत नहीं होना “ब्लू बुक” के नियमों का गंभीर उल्लंघन है। केवल सिलीगुड़ी के महापौर का उपस्थित होना भी प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं माना गया।
इसके अलावा, राष्ट्रपति के लिए बनाए गए वॉशरूम में पानी न होना और मार्ग पर कचरा पड़े रहना भी चिंता का विषय बना। पत्र में दार्जिलिंग के जिला मजिस्ट्रेट, सिलीगुड़ी के पुलिस आयुक्त और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट सहित जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी मांगी गई है।
कार्यक्रम स्थल बदलाव और कम उपस्थिति
राष्ट्रपति को आदिवासी समुदाय के वार्षिक कार्यक्रम में शामिल होना था, जो पहले सिलीगुड़ी के बिधाननगर में आयोजित होने वाला था। सुरक्षा कारणों और अन्य व्यवस्थाओं के कारण इसे बागडोगरा हवाई अड्डे के पास गोशाईपुर में स्थानांतरित किया गया। इस बदलाव से कार्यक्रम में लोगों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही।
राष्ट्रपति ने स्वयं इस परिवर्तन पर असंतोष जताया और कहा कि यदि कार्यक्रम बिधाननगर में होता, तो अधिक लोगों की भागीदारी संभव होती। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि राज्य सरकार आदिवासी समुदाय के हित में कितनी गंभीर है।
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