रूस से तेल खरीदने वाले देशों को राहत, ट्रंप ने टैरिफ लगाने के फैसले पर लगाई रोक

HIGHLIGHTS
- ट्रंप ने राष्ट्रीय हित का हवाला देकर कार्यकारी आदेश जारी किया।
- रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले पांच देशों पर 100% टैरिफ का प्रावधान था।
- कानून में रूसी ऊर्जा उत्पादों पर 500% टैरिफ लगाने की व्यवस्था भी थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े कानून के तहत लगने वाले प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों से छूट देने का आदेश जारी किया है। उनके इस फैसले से भारत और चीन को बड़ी राहत मिली है।
ये प्रतिबंध और शुल्क पिछले महीने ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित विधेयक के तहत लागू होने वाले थे। इनके प्रभावी होने से ठीक एक दिन पहले राष्ट्रपति ने छूट देने का निर्णय लिया।
शुक्रवार शाम जारी कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने कहा, “मैं इसके तहत ग्राहम कानून में दिए गए ऐसे प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों के लागू होने से छूट दे रहा हूं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में यह छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। इस संबंध में उन्होंने कांग्रेस को प्रमाणपत्र भी सौंपा है।
ट्रंप ने अपने फैसले में बदलाव क्यों किया?
ट्रंप का यह आदेश ऐसे समय आया है, जब रूस को लेकर उनका रुख नरम दिखाई दे रहा है। वह सार्वजनिक रूप से यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की आलोचना कर चुके हैं। उन्होंने यहां तक सुझाव दिया था कि यूक्रेन को अपना नया नेता चुनना चाहिए।
पिछले सप्ताह ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक समझौते की घोषणा की थी। इसके तहत रूस अमेरिका को डीजल की आपूर्ति करेगा। समझौते के अनुसार, रूस तत्काल तीन लाख टन से अधिक डीजल भेजेगा। इसके बाद आने वाले महीनों में भी डीजल की अतिरिक्त खेप भेजी जाएंगी।
जेलेंस्की ने अमेरिका और रूस के बीच हुए इस समझौते की आलोचना की थी। उन्होंने इसे ''हमारे साझेदारों के लिए अशोभनीय'' और ''कमजोर फैसला'' बताया था। उन्होंने यह आरोप भी लगाया था कि मॉस्को इस समझौते के लिए अपना “आभार” यूक्रेन पर हमले करके जता रहा है।
भारत पर क्या पड़ सकता था असर?
यदि ट्रंप भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाते, तो यह अमेरिका की ओर से भारतीय आयात पर पहले से लागू 10 प्रतिशत शुल्क के अतिरिक्त होता। अमेरिका ने यह 10 प्रतिशत टैरिफ जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने के आरोप में लगाया था।
हालांकि, नए टैरिफ का भारतीय निर्यात पर वास्तविक असर कितना होता, इसका आकलन शुल्क दरों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही किया जा सकता था।
पिछले साल रूस से कच्चे तेल के आयात को लेकर भारत और अमेरिका के संबंधों में तनाव बढ़ गया था। उस दौरान ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने के कारण भारतीय आयात पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। यह शुल्क पहले से लागू 25 प्रतिशत जवाबी टैरिफ के अतिरिक्त था।
हालांकि, फरवरी 2026 में अतिरिक्त टैरिफ हटा लिया गया था। वहीं, भारत-अमेरिका व्यापार ढांचे के तहत जवाबी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया था।
भारत ने क्या प्रतिक्रिया दी थी?
पिछले महीने अमेरिकी कांग्रेस द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित विधेयक पारित किए जाने के बाद भारत ने स्पष्ट किया था कि वह अपने व्यापारिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा था, ''जैसा कि पहले भी कई मौकों पर कहा गया है, भारत अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसके लिए वह ऊर्जा के विविध स्रोतों से आपूर्ति जारी रखेगा और बदलते बाजार की परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेगा।''
क्या है रूस और ईरान से जुड़ा यह विधेयक?
'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' नाम का यह कानून सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर बनाया गया था। ग्राहम अमेरिकी संसद में यूक्रेन के प्रमुख समर्थकों में से एक थे। इस साल जुलाई में कीव की यात्रा से लौटने के कुछ समय बाद उनका निधन हो गया था।
इस कानून के तहत ट्रंप को रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले पांच प्रमुख देशों—चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान—से आने वाले सभी सामानों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने के लिए 30 दिन का समय दिया गया था।
इसके अलावा, कानून में रूस की कई संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने और अमेरिका में आयात होने वाले सभी रूसी ऊर्जा उत्पादों पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान भी था। इस कानून के तहत निर्धारित एक महीने की समयसीमा 18 अक्टूबर को समाप्त होने वाली थी।
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