पश्चिम एशिया तनाव पर संसद में हंगामा, राहुल गांधी बोले- चर्चा से क्यों भाग रही सरकार?

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में सोमवार को पश्चिम एशिया में जारी संकट को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विदेश मंत्री ने सदन में मौजूदा हालात पर सरकार का पक्ष रखा, लेकिन इसके बाद विपक्ष ने इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की मांग करते हुए सरकार को घेरना शुरू कर दिया।
राहुल गांधी ने उठाए आर्थिक असर के सवाल
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव भारत के लिए गंभीर आर्थिक चुनौती बन सकता है। उनका कहना था कि इस संकट का असर देश की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।
राहुल गांधी ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि अगर यह इतना महत्वपूर्ण मुद्दा है, तो इस पर संसद में खुलकर चर्चा क्यों नहीं कराई जा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस विषय पर बहस से बच रही है।
‘ईंधन की कीमतों पर पड़ेगा असर’
राहुल गांधी ने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति बिगड़ने से तेल और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे अहम मुद्दों पर संसद में गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
ऊर्जा सुरक्षा पर भी चिंता
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में बदलते हालात का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि भारत अपनी कच्चे तेल की बड़ी जरूरत पश्चिम एशियाई देशों से आयात के जरिए पूरी करता है।
खरगे के मुताबिक यदि क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो इसका सीधा असर भारत की आर्थिक स्थिति और आम लोगों पर पड़ सकता है।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा
खरगे ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया के कई देशों में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं और वहां की स्थिरता उनके रोजगार और सुरक्षा से जुड़ी है। हाल के घटनाक्रमों में कुछ भारतीयों के मारे जाने या लापता होने की खबरें भी सामने आई हैं, जो चिंता का विषय है।
सदन में हंगामा और विपक्ष का वॉकआउट
सदन में इस मुद्दे को लेकर विपक्ष लगातार चर्चा की मांग करता रहा। सभापति ने कहा कि पहले विदेश मंत्री स्थिति पर आधिकारिक जानकारी देंगे और उसके बाद विपक्ष को बोलने का अवसर दिया जाएगा।
हालांकि विपक्ष इस व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हुआ और नारेबाजी शुरू कर दी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हंगामे के बीच ही पश्चिम एशिया के हालात पर सरकार की जानकारी दी। इसके बाद विपक्षी दलों ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
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