सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, 10 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा सोना

HIGHLIGHTS
- दिल्ली के सर्राफा बाजार में लगातार दूसरे सत्र में बिकवाली का दबाव रहा।
- सोने का भाव गिरकर ₹1,42,000 प्रति 10 ग्राम रह गया।
- चांदी शुक्रवार के ₹1,90,200 के मुकाबले घटकर ₹1,86,000 प्रति किलोग्राम पर पहुंची।
नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों में बहुमूल्य धातुओं की तेज बिकवाली का असर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में भी देखने को मिला। शनिवार को सोने और चांदी, दोनों की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना ₹3,200 सस्ता होकर ₹1,42,000 प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) पर पहुंच गया। शुक्रवार को इसका भाव ₹1,45,200 प्रति 10 ग्राम था।
सोने का मौजूदा भाव पिछले 10 महीनों का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले 26 दिसंबर 2025 को सोना ₹1,42,300 प्रति 10 ग्राम पर दर्ज किया गया था। वहीं, चांदी की कीमत भी ₹4,200 घटकर ₹1,86,000 प्रति किलोग्राम रह गई। वैश्विक बाजार में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख की आशंका और ऊर्जा कीमतों में तेजी को कीमती धातुओं पर दबाव की प्रमुख वजह माना जा रहा है।
घरेलू बाजार में सोने-चांदी के भाव में कितनी गिरावट आई?
ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के हाजिर बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बिकवाली का दबाव बना रहा। शनिवार को दर्ज किए गए प्रमुख भाव इस प्रकार रहे:
सोना: 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना ₹3,200 गिरकर ₹1,42,000 प्रति 10 ग्राम (कर सहित) पर आ गया।
सोने का पिछला निचला स्तर: इससे पहले 26 दिसंबर 2025 को सोने का भाव ₹1,42,300 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया था।
चांदी: चांदी की कीमत ₹4,200 घटकर ₹1,86,000 प्रति किलोग्राम (कर सहित) रह गई। शुक्रवार को यह ₹1,90,200 प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।
चांदी का पिछला निचला स्तर: 8 दिसंबर 2025 को चांदी का भाव ₹1,85,000 प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया था।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं की कीमतें गिरीं
विदेशी बाजारों में भी शुक्रवार को सोने और चांदी में भारी बिकवाली देखने को मिली।
स्पॉट गोल्ड: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 145.84 डॉलर यानी करीब 4 प्रतिशत गिरकर 3,875.55 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। यह एक साल से अधिक समय का निचला स्तर है। इससे पहले 3 अक्टूबर 2025 को इसका भाव 3,887.09 डॉलर प्रति औंस दर्ज किया गया था।
स्पॉट सिल्वर: चांदी 3.04 डॉलर यानी 6 प्रतिशत टूटकर 49.12 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई।
शंघाई कॉन्ट्रैक्ट्स: शंघाई के वायदा बाजार में भी कीमती धातुओं के भाव में तेज गिरावट दर्ज की गई, हालांकि कीमतें वैश्विक बाजार के मुकाबले प्रीमियम पर बनी रहीं।
कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट की वजह क्या है?
360 वन एसेट के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और फंड मैनेजर राहुल खेतावत के अनुसार, ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। इसके चलते अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से सख्त रुख अपनाए जाने की संभावना बनी है। इस स्थिति ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कमजोर किया है, जिसका असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटीज विश्लेषक मानव मोदी ने भी कीमतों में गिरावट के पीछे कई कारण बताए हैं।
अमेरिकी फेड की ओर से दरें बढ़ाने की आशंका: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई के लगातार बने रहने से दिसंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना फिर बढ़ गई है।
एआई शेयरों में गिरावट: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट के कारण निवेशकों पर नकदी जुटाने और अपनी पोजीशन बेचने का दबाव बना।
चांदी की औद्योगिक मांग: चांदी का औद्योगिक इस्तेमाल अधिक होने की वजह से इसकी कीमतों में अपेक्षाकृत ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
चीन में बिकवाली और अमेरिकी चुनाव: चीन में निवेशकों की ओर से नकदी जुटाने के लिए सोना बेचने की खबरें सामने आई हैं। इसके अलावा, अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले सट्टा शॉर्ट पोजीशन बनाई गई हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बहुमत की स्थिति भी सर्राफा बाजार की आगे की दिशा तय करने में अहम मानी जा रही है।
आगे कैसी रह सकती है सर्राफा बाजार की चाल?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसलों और ऊर्जा कीमतों में अनिश्चितता के कारण निकट भविष्य में सोने-चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
वैश्विक महंगाई और अमेरिकी फेड की मौद्रिक नीति को लेकर स्थिति स्पष्ट होने तक कीमती धातुओं में बिकवाली और लिक्विडेशन का दबाव बना रह सकता है।
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