डिजिटल ठगी के पीड़ितों को नुकसान की भरपाई करें बैंक, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

HIGHLIGHTS
- सुप्रीम कोर्ट ने RBI के KYC संशोधन निर्देशों की जांच करने की बात कही है।
- KYC से जुड़े इन निर्देशों को 31 दिसंबर तक लागू किया जाना है।
- डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर ठगी करने वाले अपराधी खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताते हैं।
डिजिटल गिरफ्तारी के बढ़ते मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि डिजिटल धोखाधड़ी के शिकार लोगों को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए बैंकों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। वहीं, व्हाट्सएप ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि अब तक 9,400 संदिग्ध खातों पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के केवाईसी संशोधन संबंधी निर्देशों की जांच करने की बात कही है। इन निर्देशों को 31 दिसंबर तक लागू किया जाना है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी होने की स्थिति में बैंकों की उनके प्रति जिम्मेदारी बनती है। बैंकों को असामान्य लेनदेन की जानकारी नजदीकी पुलिस थानों को तुरंत देनी चाहिए।
अदालत ने कहा कि डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने और पीड़ितों को सुरक्षा देने के लिए बैंकों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। ऐसे मामलों में बैंकों की निष्क्रियता स्वीकार नहीं की जाएगी। ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बैंकों की प्राथमिकता होनी चाहिए।
क्या है डिजिटल गिरफ्तारी से जुड़ी धोखाधड़ी?
डिजिटल गिरफ्तारी से जुड़ी धोखाधड़ी में अपराधी खुद को पुलिसकर्मी या सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते और धमकाते हैं। इसके बाद वे पीड़ितों पर ऑनलाइन लेनदेन करने या पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं। कई बार अपराधी लोगों को यह भरोसा दिलाते हैं कि उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज है।
इस तरह की ठगी में लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा बैठते हैं। डिजिटल गिरफ्तारी से जुड़ी धोखाधड़ी एक गंभीर अपराध है, जिसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
डिजिटल धोखाधड़ी रोकने में बैंकों की क्या होगी भूमिका?
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, डिजिटल धोखाधड़ी के पीड़ितों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए बैंकों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। बैंकों को संदिग्ध लेनदेन पर नजर रखने के साथ ही किसी भी असामान्य गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देनी होगी।
आरबीआई के केवाईसी नियमों की जांच से भी बैंकों की जिम्मेदारी बढ़ सकती है। इससे बैंकों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और ग्राहकों को डिजिटल धोखाधड़ी से बचाने पर ध्यान देना होगा।
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