सिरमौर: हादसे से पहले बस में लगातार आ रही थी टक-टक की आवाज, घायलों का खुलासा

सिरमौर जिले के हरिपुरधार में हुए दर्दनाक बस हादसे के घायलों ने अब कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। क्षेत्रीय अस्पताल में भर्ती घायलों का कहना है कि बस के टायर और पट्टे खराब थे और ग्रीस भी कम था। शिमला से यात्रा शुरू होने के समय से ही मोड़ पर टक-टक की आवाजें आती रही। कई यात्रियों के अनुसार, कंडक्टर ने भी दो-तीन बार ग्रीस कम होने की चेतावनी दी थी।
घायल सुनील ने बताया कि वे कुपवी के बागी गांव जा रहे थे। हरिपुरधार से लगभग 200 मीटर पहले बस में अचानक जोरदार आवाज आई और बस पलटने लगी। बस के दो पलटे खाने के बाद छत उड़ गई और कई यात्री उसमें से गिर गए। माघी के पर्व की खुशी कुछ ही मिनटों में चीख-पुकार में बदल गई।
अस्पतालों की हालातें चिंताजनक
हादसे के बाद क्षेत्रीय अस्पतालों की खामियां उजागर हो गई हैं। हरिपुरधार और राजगढ़ अस्पतालों में केवल पेनकिलर इंजेक्शन उपलब्ध हैं, अन्य आवश्यक दवाओं की भारी कमी है। घायल सूरज ने बताया कि यदि बेहतर सुविधाएं होती तो उन्हें चार घंटे तक दर्द में नहीं तड़पना पड़ता।
सरकारी बसों की कमी और निजी बसों पर निर्भरता
घटना में घायलों ने बताया कि कुपवी क्षेत्र में एक ही सरकारी बस आती-जाती है और इसकी कोई निश्चित जानकारी नहीं होती। इस कारण निजी बसें ही मुख्य परिवहन का साधन हैं। क्षेत्र की संकरी सड़कें और पर्वतीय रास्ते यात्रियों के लिए अतिरिक्त खतरा बनाते हैं।
खस्ताहाल सड़कें और जर्जर बसें
हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन की स्थिति चिंताजनक है। सरकारी नियमों के बावजूद प्रदेश में बड़ी संख्या में पुरानी और जर्जर बसें चल रही हैं। हिमाचल की कठिन भौगोलिक स्थिति के कारण बसों की उम्र मैदानी राज्यों की तुलना में जल्दी घट जाती है। एचआरटीसी के बेड़े में करीब 500 जर्जर बसें चिन्हित हैं, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से हटाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इन जर्जर बसों को हटाने का निर्णय लिया गया है।
ड्राइवरों पर बढ़ा दबाव
एचआरटीसी में स्टाफ की कमी के कारण ड्राइवरों को निर्धारित समय से अधिक ड्यूटी देनी पड़ रही है। कई ड्राइवर सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक बस चला रहे हैं। लंबे रूट और थकान के कारण दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ रहा है।
माघी पर्व में परिवारों की खुशी को बनाया मातम
हरिपुरधार हादसे में कुपवी के दस लोगों की मौत हो गई। माघी पर्व मनाने घर लौट रहे यात्रियों की यह यात्रा उनका अंतिम सफर बन गई। मृतकों में बिलम सिंह, उनकी बेटी निकिता और पत्नी सहित कई परिवार शामिल हैं। बोरा गांव के रमेश और उनकी पत्नी साक्षी की मौत के बाद दोनों की चिताएं एक साथ जलीं।
परिवार और गांव में शोक
घटना के बाद परिजन अस्पताल और गांव में दुख की गहराई में डूब गए। मृतकों के परिजन और स्थानीय ग्रामीण सदमे में हैं। हादसे ने क्षेत्र में परिवहन सुरक्षा और खस्ताहाल बसों की गंभीर स्थिति को फिर से उजागर किया है।
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