सपा ने I-PAC से तोड़ा करार, अखिलेश बोले- पैसों की कमी बनी वजह

लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) ने राजनीतिक रणनीति बनाने वाली कंपनी I-PAC के साथ अपना करार समाप्त कर दिया है। यह वही कंपनी है जिसने पिछले कई वर्षों में देश की कई प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के चुनावी अभियानों में अहम भूमिका निभाई है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी ने I-PAC के साथ कुछ समय के लिए काम किया था, लेकिन इसे आगे जारी रखना संभव नहीं हो सका। उन्होंने साफ किया कि इसका कारण हाल के चुनावी नतीजे नहीं हैं, बल्कि आर्थिक सीमाएं हैं।
अखिलेश यादव ने कहा कि पार्टी के पास चुनावी रणनीति और कंसल्टेंसी पर भारी खर्च करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। इसी वजह से यह सहयोग समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक रणनीति के लिए अलग-अलग एजेंसियों की सलाह दी जाती रही है, लेकिन हर सुझाव को अपनाना संभव नहीं होता। कई बार विभिन्न कंसल्टेंसी कंपनियों और सर्वे एजेंसियों के नाम भी सामने आते रहे हैं, लेकिन सपा अपनी परिस्थितियों के अनुसार ही निर्णय लेती है।
अखिलेश यादव ने मीडिया में चल रही उन अटकलों को भी खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों के चुनावी नतीजों की वजह से यह फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह गलत है और वास्तविक कारण केवल वित्तीय स्थिति है।
उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि अगर पर्याप्त फंड उपलब्ध हो, तो पार्टी भविष्य में किसी अन्य रणनीतिक एजेंसी के साथ भी काम कर सकती है।
गौरतलब है कि I-PAC देश की एक जानी-मानी राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म है, जो कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के चुनावी अभियानों, डिजिटल रणनीति और जमीनी स्तर की योजना बनाने में काम कर चुकी है।
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