श्रम कानून उल्लंघन पर सख्ती, नोएडा में ठेकेदारों पर करोड़ों का जुर्माना

नोएडा। श्रम कानूनों के उल्लंघन को लेकर नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। 24 फैक्ट्रियों से जुड़े 203 ठेकेदारों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू करते हुए उनके लाइसेंस निरस्त करने, आर्थिक वसूली करने और संबंधित एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई है।
अपर श्रमायुक्त राकेश द्विवेदी ने जानकारी दी कि हाल ही में हुए श्रमिक विवादों में कई ठेकेदारों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जांच में श्रम नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर इन पर 1.16 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाने के नोटिस जारी किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि अन्य ठेकेदारों की भी जांच जारी है और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में 74 अधिसूचित प्रतिष्ठानों के श्रमिकों के वेतन में 21 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी के वेतन से ईपीएफ और ईएसआई के अलावा अन्य अनधिकृत कटौती या भुगतान में देरी सामने आती है, तो संबंधित ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और उनकी जवाबदेही तय होगी।
नोएडा बवाल मामले में जांच तेज, साजिश की आशंका
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हाल ही में हुई आगजनी, तोड़फोड़ और हंगामे की घटनाओं को लेकर पुलिस और एसटीएफ ने संयुक्त जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में इस पूरे मामले के पीछे साजिश की आशंका जताई गई है।
सूत्रों के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज और घटनास्थल के वीडियो की बारीकी से जांच की जा रही है। जांच में उत्तर प्रदेश, बिहार, असम और त्रिपुरा सहित कई राज्यों के लोगों की संलिप्तता की आशंका सामने आई है। वहीं, शहर के 4 से 5 युवकों पर भी संदेह जताया गया है।
शुक्रवार को नौबस्ता और बादशाहीनाका क्षेत्र से कुछ लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। जांच एजेंसियां फेस रिकग्निशन कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही हैं, जिनमें कुछ संदिग्ध लोग पत्थर, तेल के डिब्बे और अन्य सामान के साथ नजर आए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
घटना के बाद पुलिस ने औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी है। कई बड़ी कंपनियों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। यमुना सिटी के सेक्टर-24ए स्थित वीवो कंपनी में वेतन विवाद को लेकर हुए हंगामे के बाद सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की गई है।
साजिश के नए आरोप
जांच में यह भी सामने आया है कि दिल्ली के एक विश्वविद्यालय के कुछ छात्र और एक राजनीतिक दल से जुड़े लोग इस पूरे घटनाक्रम को भड़काने में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, यह समूह पहले भी अन्य राज्यों में हुए मजदूर आंदोलनों के दौरान सक्रिय रहा है।
एसटीएफ इन सभी कड़ियों को जोड़कर जांच कर रही है और जल्द ही मामले में शामिल लोगों की पहचान कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा सकती है।
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