शुकतीर्थ में स्वामी आनंदवेश महाराज का निधन, शोक में डूबी तीर्थ नगरी

मुजफ्फरनगर। तीर्थ नगरी शुकतीर्थ में आध्यात्मिक और शैक्षिक जगत को गहरा आघात लगा है। गुरुकुल संस्कृत महाविद्यालय के संस्थापक और वैदिक योग आश्रम के प्रणेता स्वामी आनंद वेश महाराज का शुक्रवार देर रात 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके देहावसान की खबर मिलते ही शुकतीर्थ सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर फैल गई।
हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव कवाली में जन्मे स्वामी आनंद वेश महाराज वर्ष 1964 में शुकतीर्थ आए थे। यहां उन्होंने वैदिक योग आश्रम की स्थापना की और बाद में वर्ष 1970 में इसे गुरुकुल संस्कृत महाविद्यालय का स्वरूप दिया। जीवन भर उन्होंने संस्कृत शिक्षा, वैदिक परंपराओं और आध्यात्मिक साधना के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
शनिवार को आश्रम परिसर में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। उनके छोटे भाई आचार्य इंद्रपाल शास्त्री ने मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि, विद्वान और श्रद्धालु शामिल हुए।
इस अवसर पर पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज, महामंडलेश्वर केशवानंद महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी गोपालदास महाराज, स्वामी विज्ञानंद महाराज, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने स्वामी आनंद वेश महाराज के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
स्वामी आनंद वेश महाराज के पिता का नाम चौधरी मांगेराम और माता का नाम प्रेमो देवी था। उनके परिवार में चार भाई हैं। उनके निधन से शुकतीर्थ की धार्मिक और शैक्षिक परंपरा को अपूरणीय क्षति मानी जा रही है।
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