तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, रेप मामले में 2 हफ्ते में करना होगा सरेंडर

HIGHLIGHTS
- सुप्रीम कोर्ट ने तरुण तेजपाल की याचिका खारिज कर दी।
- दो हफ्ते के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश।
- 10 साल की सजा के खिलाफ अपील पर 22 सितंबर को सुनवाई।
सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार तरुण तेजपाल की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने 2013 के उत्पीड़न मामले में आत्मसमर्पण से राहत देने की मांग की थी। अदालत ने उन्हें मामले में मिली 10 साल की सजा के लिए दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल की दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ दाखिल अपील पर सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तारीख तय की है।
कौन हैं तरुण तेजपाल?
तरुण तेजपाल तहलका मैगजीन के संस्थापक और उसके तत्कालीन प्रधान संपादक रह चुके हैं। वर्ष 2013 में उनकी एक जूनियर महिला सहकर्मी ने उन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे, जिसके बाद वह विवादों में आ गए थे। शिकायत सामने आने के बाद तेजपाल ने छह महीने के लिए संपादक पद से हटने की घोषणा की थी, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला नवंबर 2013 का है। आरोप है कि 7 और 8 नवंबर 2013 को गोवा के एक होटल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान तरुण तेजपाल ने अपनी जूनियर महिला सहकर्मी का यौन उत्पीड़न किया था। घटना के करीब दस दिन बाद 18 नवंबर 2013 को पीड़िता ने तहलका की तत्कालीन मैनेजिंग एडिटर शोमा चौधरी से शिकायत की थी। शिकायत में उन्होंने घटना का पूरा विवरण देते हुए कार्रवाई की मांग की थी।
किन धाराओं में हाईकोर्ट ने दोषी ठहराया?
हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को दुष्कर्म और महिला की मर्यादा भंग करने का दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। उन्हें भारतीय दंड संहिता (IPC) की चार धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया।
धारा 376(2)(f): यह धारा ऐसे मामलों में लागू होती है, जब कोई व्यक्ति महिला के प्रति विश्वास, संरक्षण या अधिकार की स्थिति में रहते हुए उस स्थिति का फायदा उठाकर उसके साथ दुष्कर्म करता है।
धारा 376(2)(k): यह धारा उस स्थिति से संबंधित है, जब कोई व्यक्ति किसी महिला पर नियंत्रण, प्रभुत्व या प्रभाव की स्थिति में रहते हुए उसके साथ दुष्कर्म करता है।
धारा 354A: यह यौन उत्पीड़न से संबंधित धारा है। इसके तहत महिला की इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संपर्क करना, यौन संबंध बनाने का दबाव डालना, अश्लील सामग्री दिखाना या यौन टिप्पणी करना अपराध माना जाता है।
धारा 354B: यह धारा किसी महिला के कपड़े उतारने या उसे निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला करने या बल प्रयोग करने से संबंधित है। इस अपराध के लिए न्यूनतम तीन वर्ष और अधिकतम सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।
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