जाति जनगणना पर खरगे-राहुल ने PM मोदी को लिखी चिट्ठी, प्रश्नावली बदलने की मांग

HIGHLIGHTS
- कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने PM मोदी को संयुक्त पत्र लिखा।
- दोनों नेताओं ने जाति दर्ज करने के मौजूदा 'ओपन-एंडेड' तरीके पर आपत्ति जताई।
- एक ही जाति के अलग-अलग नाम दर्ज होने से आंकड़े बंटने की आशंका जताई गई।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त पत्र लिखा है। दोनों नेताओं ने जातियों का विवरण दर्ज करने के लिए अपनाए गए 'ओपन-एंडेड' सवाल के तरीके पर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस तरीके से देश में जातियों की वास्तविक संख्या का सही आकलन नहीं हो सकेगा।
खरगे और राहुल गांधी के मुताबिक, एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों, उपजातियों और भाषाओं के जरिए पहचानी जाती है। ऐसे में यदि लोग अपनी जाति के अलग-अलग नाम दर्ज कराएंगे, तो एक ही समुदाय का डेटा कई हिस्सों में बंट सकता है। इससे पूरी जाति जनगणना के आंकड़े अव्यवस्थित होने की आशंका है।
दोनों नेताओं ने मांग की है कि मौजूदा प्रश्नावली को रद्द कर प्रमाणित जाति सूची के आधार पर नई प्रश्नावली तैयार की जाए। इसके लिए राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और आम लोगों से व्यापक विचार-विमर्श करने की मांग भी की गई है।
सही आंकड़ों के बिना सामाजिक न्याय की नीतियां अधूरी
खरगे और राहुल गांधी ने पत्र में कहा कि भारत में सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सही और विश्वसनीय आंकड़े जरूरी हैं। अलग-अलग जातियों की आबादी और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सटीक आकलन तभी संभव है, जब उनकी संख्या भी सही तरीके से दर्ज की जाए।
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, मौजूदा प्रक्रिया में प्रत्येक व्यक्ति अपनी जाति का जो नाम बताएगा, वही दर्ज किया जाएगा। इससे एक ही जाति के अलग-अलग नाम सामने आने की आशंका है। ऐसे में देश में जातियों की संख्या वास्तविक संख्या से अधिक दिखाई दे सकती है।
OBC और वंचित समुदायों पर असर की जताई आशंका
खरगे और राहुल गांधी ने कहा कि गलत या बिखरे हुए आंकड़ों का सबसे ज्यादा असर OBC, अति पिछड़े और अन्य वंचित समुदायों पर पड़ सकता है। किसी समुदाय की वास्तविक संख्या सामने नहीं आने पर उसकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति का सही आकलन करना भी मुश्किल होगा।
इसका असर शिक्षा, रोजगार, सरकारी योजनाओं और सामाजिक न्याय से जुड़े फैसलों पर पड़ सकता है। दोनों नेताओं ने यह भी कहा कि मौजूदा जनगणना प्रक्रिया में 'पिछड़ा वर्ग' शब्द तक शामिल नहीं है। ऐसे में देश में OBC की वास्तविक आबादी का पता लगाना और मुश्किल हो सकता है।
ड्रॉपडाउन सूची को बताया व्यावहारिक समाधान
कांग्रेस नेताओं ने जातियों की पहचान के लिए पहले से तैयार और प्रमाणित सूची इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गणना में इसी तरह की सूची का इस्तेमाल किया जाता है।
उनके मुताबिक, सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ा वर्ग की मौजूदा सरकारी सूचियों और भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण के आधार पर जातियों की प्रमाणित सूची तैयार की जा सकती है। इसके बाद जनगणना में इसी सूची के आधार पर जाति दर्ज करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
तेलंगाना और बिहार के सर्वेक्षणों का दिया उदाहरण
खरगे और राहुल गांधी ने अपने पत्र में तेलंगाना और बिहार में किए गए जाति सर्वेक्षणों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों में पहले से तैयार जाति सूचियों के आधार पर आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया अपनाई गई थी।
दोनों नेताओं ने इन सर्वेक्षणों में इस्तेमाल की गई जाति सूचियों को अपने पत्र के साथ संदर्भ के लिए संलग्न करने की बात कही है।
नई प्रश्नावली तैयार करने की मांग
कांग्रेस नेताओं ने साफ किया कि वे मौजूदा तरीके से की जा रही जाति जनगणना को स्वीकार नहीं करते। उन्होंने केंद्र सरकार से वर्तमान प्रश्नावली वापस लेने और राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों तथा आम लोगों से बातचीत करने की मांग की है।
इसके साथ ही उन्होंने व्यापक सहमति के बाद नई प्रश्नावली तैयार करने की मांग रखी। उनका कहना है कि केवल जाति जनगणना कराना पर्याप्त नहीं है। हर जाति और समुदाय की संख्या सही तरीके से दर्ज होना जरूरी है, ताकि आंकड़े सटीक, सार्थक और सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों के लिए उपयोगी साबित हो सकें।
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