अल फलाह ग्रुप चेयरमैन के खिलाफ ईडी की चार्जशीट पर सुनवाई 13 फरवरी तक टली

दिल्ली। साकेत कोर्ट ने अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की चार्जशीट पर सुनवाई को 13 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दिया है। यह सुनवाई एडिशनल सेशन जज शीतल चौधरी प्रधान कर रही थीं। बचाव पक्ष के वकील ने चार्जशीट और अन्य दस्तावेजों की समीक्षा के लिए और समय मांगा, क्योंकि यह रिकॉर्ड लगभग 10 हजार पन्नों का है।
ईडी ने सिद्दीकी और उनके चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ भी चार्जशीट दायर की है। फरीदाबाद के धौज क्षेत्र में स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी की 54 एकड़ जमीन और इमारतों को मनी लांड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत अटैच किया गया है। यूनिवर्सिटी के परिसर में स्कूल, विभाग और छात्रावास शामिल हैं।
यह कार्रवाई 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए विस्फोट के बाद सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में हुई थी। ईडी ने नवंबर 2025 में सिद्दीकी को मनी लांड्रिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उनके ट्रस्ट ने नामांकित छात्रों और जनता को धोखे में डालकर वित्तीय लाभ अर्जित किया।
जांच में यह भी सामने आया कि अल फलाह यूनिवर्सिटी ने छात्रों, अभिभावकों और हितधारकों को नैक और यूजीसी मान्यता को लेकर भ्रामक जानकारी दी। ईडी का दावा है कि 2018 से 2025 के बीच यूनिवर्सिटी ने 415.10 करोड़ रुपये का राजस्व दिखाया, जो उनके घोषित वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्तियों से मेल नहीं खाता।
जांच में यह आरोप भी शामिल हैं कि छात्रों की फीस और अन्य फंड का इस्तेमाल व्यक्तिगत लाभ के लिए किया गया। सिद्दीकी ने अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट और संबंधित संस्थाओं पर वास्तविक नियंत्रण बनाए रखा।
इसके अलावा, यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ डॉक्टरों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। मुजम्मिल अहमद गनई और शाहीन सईद को एनआईए और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। यूनिवर्सिटी के अस्पताल से जुड़े डॉ. उमर-उन-नबी का नाम उस आत्मघाती हमलावर के रूप में सामने आया, जिसने 10 नवंबर को लाल किले के बाहर विस्फोटक से भरी कार चलाई थी, जिसमें 15 लोगों की मौत हुई थी।
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