पंजाब में फिर साथ आ सकते हैं BJP और SAD? हरसिमरत कौर बादल के बयान से बढ़ी सियासी हलचल

HIGHLIGHTS
- हरसिमरत कौर बादल ने संगरूर में कार्यक्रम को संबोधित किया।
- उन्होंने पंजाब के विकास और केंद्र सरकार के सहयोग की बात कही।
- स्किल्ड यूनिवर्सिटी की मांग को लेकर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी।
पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के बीच एक बार फिर गठबंधन की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। शिअद नेता और बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल के बयान के बाद दोनों दलों के दोबारा साथ आने की अटकलों को और बल मिला है।
हरसिमरत ने की पंजाब के विकास की बात
संगरूर में शिरोमणि अकाली दल के पूर्व अध्यक्ष संत हरचंद सिंह लोंगोवाल की बरसी के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में हरसिमरत कौर बादल ने लोगों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने पंजाब के विकास और केंद्र सरकार के सहयोग को लेकर अपनी बात रखी।
‘प्रदेश में बड़े विकास कार्यों की नींव रखी जाएगी’
हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि आपने स्किल्ड यूनिवर्सिटी की मांग रखी है। यह तो छोटे-छोटे काम हैं। गुरु साहिब की मेहरबानी हो और अगर पहले की तरह ऐसे समझौते बनें, जिनसे दिल्ली से विकास के काम पंजाब तक पहुंचें तो प्रदेश में बड़े विकास कार्यों की नींव रखी जाएगी।
संभावित समझौते के संकेत
हालांकि, हरसिमरत कौर बादल ने भाजपा और शिअद के बीच संभावित गठबंधन को लेकर सीधे तौर पर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की। उन्होंने इस मुद्दे पर विस्तार से बोलने से बचते हुए कहा कि इस बारे में घोषणा करना उनका काम नहीं है और समय आने पर सब कुछ लोगों के सामने आ जाएगा। उनके इस बयान को भाजपा और अकाली दल के बीच संभावित राजनीतिक समझौते के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
‘इन लोगों को पंजाब से कोई लगाव या हमदर्दी नहीं’
उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब भी शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब में शांति और आपसी भाईचारे के लिए काम करने का प्रयास किया है, तब उसे कमजोर करने के लिए कई छोटे-छोटे गुटों को पनपने दिया गया। उन्होंने कहा कि ऐसा उन ‘बाहरी लोगों’ ने किया है, जिन्हें पंजाब से कोई लगाव या हमदर्दी नहीं है। वे केवल हमें लूटना और हम पर राज करना चाहते हैं।
महिला आरक्षण का समर्थन
हाल ही में शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई थीं। इसके बाद अकाली दल ने महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की मांग का समर्थन किया। साथ ही, केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव के समर्थन की भी बात सामने आई, जिसमें लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया गया है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.




























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.