तमिलनाडु में टीवीके कार्यकर्ता ने किया आत्मदाह का प्रयास, हालत गंभीर

तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के एक पदाधिकारी ने कथित मानसिक तनाव में आकर आत्मदाह का प्रयास किया।
नेता के शपथ ग्रहण को लेकर तनाव का आरोप
यह घटना तिरुनेलवेली जिले के चेट्टीकुलम के पास एक गांव की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार 47 वर्षीय इसक्कियप्पन, जो TVK की वल्लियूर यूनियन की स्वयंसेवक विंग में उप सचिव के पद पर कार्यरत हैं, पार्टी प्रमुख विजय के शपथ ग्रहण को लेकर चल रही अनिश्चितता से परेशान थे। इसी कारण उन्होंने यह कदम उठाया।
गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती
आग की चपेट में आने के बाद स्थानीय लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक वह गंभीर रूप से झुलस चुके थे। उन्हें तुरंत सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल, असरपल्लम में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि वह करीब 30 प्रतिशत तक जल चुके हैं और उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। फिलहाल उनका इलाज आईसीयू में चल रहा है।
इस घटना के बाद इलाके में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच चिंता और निराशा का माहौल है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस कदम के पीछे केवल राजनीतिक कारण थे या कोई अन्य दबाव भी शामिल था।
पार्टी में समर्थन और सरकार गठन की चर्चाएं तेज
इधर तमिलनाडु की राजनीति में सरकार गठन को लेकर भी हलचल तेज है। विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच समर्थन को लेकर चर्चाएं जारी हैं। कांग्रेस और कुछ अन्य दलों के रुख को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, संभावित राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए कई दल अपने-अपने विधायकों की सुरक्षा और रणनीति को लेकर सतर्क हैं।
सहयोगी दलों में रुख को लेकर असमंजस
वीसीके (विदुथलाई चिरुथाइगल काची) के प्रमुख थोल थिरुमावलवन जल्द ही TVK को समर्थन देने को लेकर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट कर सकते हैं। हालांकि अभी तक पार्टी की ओर से अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
सरकार गठन के लिए जोड़-तोड़ की स्थिति
विधानसभा चुनाव में TVK के बेहतर प्रदर्शन के बाद अब सरकार गठन को लेकर संभावित गठबंधन की चर्चा तेज हो गई है। पार्टी ने पहले ही कांग्रेस और वाम दलों से समर्थन की अपील की थी, जबकि विभिन्न दलों के बीच राजनीतिक समीकरण लगातार बदलते नजर आ रहे हैं।
फिलहाल पूरे मामले में राजनीतिक अनिश्चितता के साथ-साथ एक कार्यकर्ता की आत्मदाह की घटना ने माहौल को और गंभीर बना दिया है।
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