तमिलनाडु के 9वें मुख्यमंत्री बने विजय, 9 विधायकों ने ली मंत्री पद की शपथ

HIGHLIGHTS
- तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय से खाली पड़े “सिनेमा स्टार से जननेता” वाले स्थान को अब अभिनेता थलापति विजय ने भर दिया है।
- पिछले कई दशकों से राज्य की सत्ता और जनभावनाओं पर द्रविड़ राजनीति का दबदबा रहा है, लेकिन अब राजनीतिक परिदृश्य में एक नया चेहरा तेजी से उभरता दिखाई दे रहा है।
- 2016 में जे.
- जयललिता और 2018 में एम.
- करुणानिधि के निधन के बाद तमिल राजनीति में एक बड़े करिश्माई नेतृत्व की कमी महसूस की जा रही थी।
- इससे पहले एम.जी.
तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय से खाली पड़े “सिनेमा स्टार से जननेता” वाले स्थान को अब अभिनेता थलापति विजय ने भर दिया है। पिछले कई दशकों से राज्य की सत्ता और जनभावनाओं पर द्रविड़ राजनीति का दबदबा रहा है, लेकिन अब राजनीतिक परिदृश्य में एक नया चेहरा तेजी से उभरता दिखाई दे रहा है।
2016 में जे. जयललिता और 2018 में एम. करुणानिधि के निधन के बाद तमिल राजनीति में एक बड़े करिश्माई नेतृत्व की कमी महसूस की जा रही थी। इससे पहले एम.जी. रामचंद्रन (एमजीआर), जयललिता और करुणानिधि जैसे नेताओं ने फिल्मी लोकप्रियता के सहारे राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई थी। लंबे समय तक यही “सिनेमा-राजनीति” का मॉडल तमिलनाडु की पहचान बना रहा।
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में एम.के. स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन फिल्मी दुनिया में वैसी व्यापक लोकप्रियता नहीं बना सके जैसी पहले के सुपरस्टार नेताओं को मिली थी। इसी बीच अभिनेता विजय ने अपनी अलग पहचान बनाते हुए धीरे-धीरे जनसमर्थन जुटाना शुरू किया।
तमिल फिल्म इंडस्ट्री में ‘थलापति’ विजय के नाम से मशहूर विजय ने अपने करियर की शुरुआत बाल कलाकार के रूप में की थी। 1992 में बतौर मुख्य अभिनेता उनकी पहली फिल्म आई, जिसने भले ही सफलता हासिल न की हो, लेकिन आगे चलकर उन्होंने लगातार हिट फिल्मों के जरिए खुद को सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में शामिल कर लिया। आज उन्हें रजनीकांत के बाद सबसे प्रभावशाली स्टार्स में गिना जाता है।
फिल्मी करियर के साथ-साथ विजय ने अपने प्रशंसकों के बीच मजबूत संगठनात्मक नेटवर्क भी तैयार किया। उनके फैन क्लब “विजय मक्कल इयक्कम” ने सामाजिक कार्यों के जरिए जमीन पर अपनी मौजूदगी मजबूत की। कई स्थानीय चुनावों में इस संगठन से जुड़े उम्मीदवारों ने भी सफलता हासिल की, जिससे उनकी राजनीतिक क्षमता का संकेत पहले ही मिल चुका था।
राजनीति में उनके बढ़ते प्रभाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा रहा है कि उनकी पार्टी टीवीके के उभार ने राज्य की दो प्रमुख द्रविड़ पार्टियों—द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK)—के पारंपरिक प्रभाव को चुनौती दी है।
विजय ने अपनी राजनीति में युवाओं, महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार विरोध और तमिल अस्मिता जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी है। उनकी छवि एक ऐसे नेता के रूप में बन रही है जो सिस्टम में बदलाव और नई राजनीतिक सोच का प्रतिनिधित्व करता है।
तमिलनाडु की राजनीति 1967 से मुख्य रूप से द्रविड़ विचारधारा के इर्द-गिर्द घूमती रही है, जहां फिल्मी सितारों ने भी सत्ता तक पहुंचने में बड़ी भूमिका निभाई। अब थलापति विजय के रूप में एक नया अध्याय शुरू होता दिख रहा है, जिसने राज्य की पारंपरिक राजनीतिक संरचना को नई चुनौती दे दी है।
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