शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान की तुलना पर छिड़ी जंग, महाराष्ट्र में राजनीति गरमाई

महाराष्ट्र में राजनीति का तापमान बढ़ गया है, जब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने छत्रपति शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान की तुलना कर दी। इस बयान के बाद राज्य में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए और सियासी बहस तेज हो गई।
अब इस मामले पर कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। सावंत का कहना है कि बीजेपी समाज को बांटने और दोहरे मापदंड अपनाने में लगी हुई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस तुलना को गलत ठहराते हुए कहा कि कांग्रेस नेता को इस पर शर्मिंदा होना चाहिए।
सचिन सावंत ने अपनी प्रतिक्रिया में बीजेपी के पुराने फैसलों को याद दिलाया। उन्होंने कहा कि 2012 में अकोला नगर निगम में बीजेपी नेता विजय अग्रवाल ने एक हॉल का नाम टीपू सुल्तान के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा था। 2013 में मुंबई के एम-ईस्ट वार्ड में एक सड़क का नाम टीपू सुल्तान के नाम पर रखा गया था, जिसमें बीजेपी पार्षदों ने समर्थन दिया था। 2001 में अंधेरी वेस्ट में भी टीपू सुल्तान मार्ग नामक सड़क के प्रस्ताव में पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी और बीजेपी पार्षद शामिल थे।
सावंत ने दावा किया कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा ने टीपू सुल्तान की मजार पर जाकर विजिटर्स बुक की तारीफ की थी। इसके अलावा, उन्होंने 2017 में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के कर्नाटक विधानसभा में दिए भाषण का भी जिक्र किया, जिसमें टीपू सुल्तान की प्रशंसा की गई थी। सावंत ने यह भी बताया कि टीपू सुल्तान भगवान राम के नाम की अंगूठी पहनते थे।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि बीजेपी अब केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए टीपू सुल्तान को गलत ढंग से पेश कर रही है। हाल ही में मालेगांव नगर निगम में भी टीपू सुल्तान की तस्वीर को लेकर विवाद सामने आया था।
इस विवाद की शुरुआत हर्षवर्धन सपकाल के उस बयान से हुई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि जिस तरह छत्रपति शिवाजी महाराज ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया, उसी तरह टीपू सुल्तान ने भी लड़ाई लड़ी। इतिहास में टीपू सुल्तान को लेकर अलग-अलग राय मौजूद हैं—जहां कुछ लोग उन्हें बहादुर मानते हैं, वहीं कुछ लोग उन पर कट्टरता का आरोप लगाते हैं।
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