महाराष्ट्र के सरकारी स्कूल में CJP का ‘निरीक्षण’, अभिजीत दीपके ने लगाए ‘किराए के छात्रों’ के आरोप; स्कूल ने किया खंडन

HIGHLIGHTS
- दीपके ने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत औसा के सरकारी स्कूल का दौरा किया।
- उन्होंने दावा किया कि कुछ छात्र स्कूल के रिकॉर्ड में पंजीकृत नहीं थे।
- स्कूल परिसर में शराब की बोतलें मिलने का भी आरोप लगाया गया।
मुंबई। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र के लातूर जिले के औसा क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल का औचक ‘निरीक्षण’ किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके दौरे को सही दिखाने के लिए दूसरे स्कूलों से ‘किराए के छात्र’ लाकर कक्षाओं में बैठाए गए थे। उन्होंने स्कूल परिसर में शराब की बोतलें मिलने का दावा भी किया।
नीट पेपर लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे की मांग के बाद अब अभिजीत दीपके ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत अपने नए मिशन पर निकले हैं।
गुरुवार को अपने अभियान के तहत दीपके ने लातूर जिले के औसा क्षेत्र में एक सरकारी स्कूल का दौरा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला परिषद के एक स्कूल में उनके पहुंचने पर दूसरे स्कूल के छात्रों को कक्षाओं में बैठाया गया था। उनका दावा है कि कक्षा में मौजूद कुछ छात्र स्कूल के रिकॉर्ड में पंजीकृत भी नहीं थे।
महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग
अभिजीत दीपके ने यह भी दावा किया कि स्कूल परिसर में शराब की बोतलें मिलीं। सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर उन्होंने महाराष्ट्र के स्कूली शिक्षा मंत्री दादा भुसे के इस्तीफे की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग भी की।
मीडिया से बातचीत में दीपके ने कहा कि मुंबई से 500 किलोमीटर से अधिक दूर स्थित औसा के स्कूल में पीने के पानी की कमी थी और उनके पहुंचने से कुछ समय पहले ही शौचालयों की सफाई की गई थी।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में दीपके ने दावा किया कि उनके दौरे की जानकारी मिलने के बाद दोपहर के भोजन के लिए प्लेटें भी नई लाई गईं। वीडियो में वह छात्रों से बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान एक बच्चे ने बताया कि वह इस स्कूल का छात्र नहीं है। इसके बाद दीपके ने हैरानी जताई और एक शिक्षक से बहस करते नजर आए।
स्कूल प्रबंधन ने दीपके के दावे को खारिज किया
हालांकि, स्कूल अधिकारियों ने अभिजीत दीपके के आरोपों को खारिज कर दिया। स्कूल के प्रधानाध्यापक बालाजी गावली ने बताया कि एक ही इमारत में दो अलग-अलग स्कूल, एक मराठी माध्यम और दूसरा उर्दू माध्यम, संचालित होते हैं। उन्होंने बाहर से छात्रों को लाए जाने के दावे का भी खंडन किया।
प्रधानाध्यापक ने कहा कि वहां मौजूद बच्चे स्कूल के ही छात्र थे। उन्होंने दीपके के इस आरोप को भी गलत बताया कि नई प्लेटें केवल दिखावे के लिए लाई गई थीं। उनका कहना था कि बच्चे स्कूल को उपलब्ध कराई गई पुरानी प्लेटों में ही खाना खा रहे थे।
प्रधानाचार्य ने कहा कि दीपके को यह गलतफहमी हुई कि व्यवस्थाएं और प्रदर्शन विशेष रूप से उनके दौरे के लिए किए गए थे, जबकि ऐसा नहीं था।
‘कुत्ते को भी इन छात्रों से बेहतर सुविधाएं मिलती हैं’
अभिजीत दीपके ने सरकारी स्कूलों में छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि यहां बच्चे जानवरों से भी खराब परिस्थितियों में रहते हैं। उन्होंने कहा, “एक मंत्री के कुत्ते को भी इन छात्रों से बेहतर सुविधाएं मिलती हैं। यदि सरकार दस वर्षों में टपकती छतों की मरम्मत या बेंचों की कमी को दूर नहीं कर पाई है, तो उन्होंने वास्तव में क्या हासिल किया है?”
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