‘एट होम’ समारोह का खास निमंत्रण: अष्टलक्ष्मी राज्यों की कला से सजा अनोखा तोहफा

देश 26 जनवरी को अपना 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और भव्यता के साथ मनाने की तैयारी में है। इस अवसर पर नई दिल्ली में पारंपरिक परेड सहित कई विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे। इन्हीं आयोजनों में राष्ट्रपति भवन में होने वाला प्रतिष्ठित ‘एट होम’ समारोह भी शामिल है, जिसकी मेजबानी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी। इस खास अवसर के लिए राष्ट्रपति भवन की ओर से आमंत्रित अतिथियों को एक विशिष्ट और सांस्कृतिक संदेश से जुड़ा निमंत्रण पत्र भेजा गया है।
अष्टलक्ष्मी राज्यों की कला को समर्पित निमंत्रण
गणतंत्र दिवस 2026 के ‘एट होम’ समारोह के लिए तैयार किया गया यह आमंत्रण पत्र पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों—जिन्हें अष्टलक्ष्मी कहा जाता है—की समृद्ध कला और शिल्प परंपराओं को सम्मान देता है। इन राज्यों के कुशल कारीगर सदियों से चली आ रही तकनीकों और स्थानीय प्राकृतिक सामग्रियों के जरिए अनोखी हस्तनिर्मित कृतियां तैयार करते आए हैं, जिनकी झलक इस निमंत्रण में दिखाई देती है।
परंपरा और प्रकृति का संगम
राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह निमंत्रण पत्र उत्तर-पूर्वी राज्यों के दैनिक जीवन, पारंपरिक रीति-रिवाजों, शिल्प कौशल और वहां के प्राकृतिक परिवेश से प्रेरित है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि समारोह के बाद भी यह एक सजावटी स्मृति के रूप में दीवारों पर लगाया जा सके, जो क्षेत्र की जीवंत सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।
बांस से सजा कवर और बॉक्स
पूर्वोत्तर भारत में बांस न केवल आर्थिक गतिविधियों बल्कि सांस्कृतिक परंपराओं का भी अहम हिस्सा है। निमंत्रण पत्र के बॉक्स में बुनी हुई बांस की चटाई का उपयोग किया गया है, जिसमें रंगे हुए सूती धागों और पतली बांस की पट्टियों से त्रिपुरा की पारंपरिक बुनाई तकनीक अपनाई गई है। बाहरी आवरण पर हाथ से बने कागज का टैग लगाया गया है, जिस पर अतिथि का पता अंकित होता है। इसके साथ धुएं से उपचारित बांस से बनी एक कलात्मक सजावट भी जोड़ी गई है, जो गहरे भूरे रंग की आकर्षक छटा प्रदान करती है।
दीवार पर सजाने योग्य स्क्रॉल
अष्टकोणीय बांस बुनाई से तैयार यह चटाई खुलने पर उत्तर-पूर्वी भारत के हर राज्य की हस्तनिर्मित कलाकृतियों का सुंदर संग्रह प्रस्तुत करती है। इसकी बनावट और तीन रंगों के धागे उस कमर-करघे की आकृति को दर्शाते हैं, जिसे क्षेत्र की महिलाएं पारंपरिक वस्त्र बुनने के लिए उपयोग करती हैं। यह पूरा डिजाइन उत्तर-पूर्व की कला, संस्कृति और महिला शिल्पकारों की रचनात्मकता को सम्मान देने का प्रतीक है।
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