एटा में अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी नियमों का कड़ा विरोध किया

एटा। सिटी मजिस्ट्रेट पद से निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने गुरुवार को एटा पहुंचकर यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ कड़ा विरोध जताया। शहीद पार्क में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि ये प्रावधान देश के बच्चों, युवाओं और आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर रूप से नुकसानदेह साबित हो सकते हैं।
अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि नए नियमों से समाज में भ्रम और विवाद की स्थिति बनेगी तथा अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई की प्रक्रिया और अधिक जटिल हो जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि कानून की संरचना ही कमजोर होगी तो पीड़ितों को न्याय मिलना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बिना गहराई से अध्ययन किए समर्थन देना दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई राजनीतिक प्रतिनिधियों के विदेशी संपत्तियों से जुड़े हित हैं और आम जनता को ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें जवाबदेह बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद में कानूनों को पारित कर दिया जाता है, लेकिन कई बार उनके दुष्परिणामों पर पर्याप्त विचार नहीं होता।
अग्निहोत्री ने बताया कि वह अगस्त 2020 से फरवरी 2023 तक एटा में तैनात रहे हैं और उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का गठन नहीं बल्कि लोगों को जागरूक करना है ताकि सरकार इन नियमों पर दोबारा विचार करे। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी समाज या संगठन द्वारा आमंत्रित किया जाएगा तो वे वहां जाकर अपनी बात रखेंगे।
यूजीसी नियमों पर वरिष्ठ नेताओं द्वारा उठाए गए सवालों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसके बावजूद कई जनप्रतिनिधि इन प्रावधानों की गंभीरता को समझने को तैयार नहीं हैं। उनके अनुसार यह नियम सभी वर्गों- सामान्य, एससी, एसटी और ओबीसी- को प्रभावित करेगा और सामाजिक तनाव बढ़ा सकता है।
उन्होंने जनप्रतिनिधियों की संपत्तियों की उच्चस्तरीय जांच की भी मांग की और कहा कि जांच एजेंसियों के पास पर्याप्त जानकारियां मौजूद हैं, जो समय आने पर सामने आएंगी। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने उसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया।
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