जामिया में छात्र संघ बहाली विवाद के बीच शिक्षकों ने बाहरी हस्तक्षेप पर जताई नाराजगी

HIGHLIGHTS
- कुलपति प्रो. मजहर आसिफ की अध्यक्षता में परिसर की स्थिति पर चर्चा हुई।
- छात्र संघ की बहाली के लिए 21 अक्टूबर को संविधान मसौदा समिति बनाई गई।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ की बहाली को लेकर चल रहे विवाद के बीच विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने राजनीतिक हस्तक्षेप और बाहरी लोगों की गतिविधियों पर नाराजगी जताई है। शिक्षकों का आरोप है कि जामिया के आंतरिक मामले को राजनीतिक रंग देकर परिसर का माहौल खराब करने और शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा डालने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, 24 अक्टूबर से जामिया के बाहर के लोगों ने राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र विभागों की इमारतों पर कब्जा कर ताले लगा दिए हैं।
जामिया प्रशासन के अनुसार, प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों पर बातचीत जारी है और छात्र संघ की बहाली की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। इस मुद्दे पर कुलपति प्रो. मजहर आसिफ की अध्यक्षता में बैठक भी हुई, जिसमें परिसर की स्थिति, ऑनलाइन कक्षाओं और छात्रों की मांगों पर चर्चा की गई।
जामिया के शिक्षकों के मुताबिक, छात्र संघ को वर्ष 2006 में हिंसक घटनाओं और शिक्षकों पर हमलों के बाद भंग कर दिया गया था। उनका कहना है कि मौजूदा प्रशासन ने करीब दो दशक बाद इस मुद्दे के समाधान की दिशा में पहल की है। 21 अक्टूबर को गठित संविधान मसौदा समिति को अदालती आदेशों, लिंगदोह समिति की सिफारिशों और जामिया के नियमों के अनुरूप मसौदा तैयार करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
परिसर में सांसदों के प्रवेश पर भी उठाए सवाल
शिक्षकों ने कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और इमरान मसूद के परिसर में प्रवेश को लेकर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, प्रशासन ने इस संबंध में 25 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज कराई थी।
जामिया प्रशासन के मुताबिक, इमरान प्रतापगढ़ी 21 अक्टूबर को गेट नंबर 4ए का ताला तोड़कर परिसर में दाखिल हुए थे। वहीं, इमरान मसूद 23 अक्टूबर को गफूर नगर के पास सीढ़ी के सहारे दीवार फांदकर अंदर आए थे। शिक्षकों ने समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी को परिसर आते समय हिरासत में लिए जाने की जानकारी भी दी।
विभागों में ताले लगने के बाद ऑनलाइन हुई पढ़ाई
शिक्षकों ने दावा किया कि 24 अक्टूबर से बाहरी लोगों ने राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र विभागों की इमारतों पर कब्जा कर ताले लगा दिए हैं। इसके चलते जामिया को दिवाली की छुट्टियों तक कक्षाएं ऑनलाइन माध्यम से संचालित करनी पड़ीं। आगे की व्यवस्था को लेकर स्थिति की समीक्षा के बाद निर्णय लिया जाएगा।
शिक्षकों ने प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में पूर्व छात्रों, कलाकारों, वकीलों और अन्य नागरिकों के समूह की संयुक्त प्रेस वार्ता के समय और उद्देश्य पर भी सवाल उठाए। जामिया प्रशासन ने अपील की है कि बाहरी लोग विश्वविद्यालय के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करें और शैक्षणिक गतिविधियों को बाधित करने से बचें।
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