अमित शाह के सामने सीएम विजय ने उठाए NEET, परिसीमन और कावेरी जल के मुद्दे

HIGHLIGHTS
- महाबलीपुरम में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक हुई
- विजय ने 12वीं के अंकों के आधार पर मेडिकल दाखिले की मांग रखी
- जनसंख्या स्थिरीकरण के कारण राज्यों का प्रतिनिधित्व न घटाने की मांग
महाबलीपुरम। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने गुरुवार को NEET और परिसीमन के खिलाफ अपनी बात रखी। उन्होंने दक्षिणी राज्यों के लिए वित्तीय न्याय की मांग करने के साथ कावेरी जल के मुद्दे पर भी तमिलनाडु का पक्ष रखा।
गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को तमिलनाडु के महाबलीपुरम में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक की अध्यक्षता की। अमित शाह दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद के अध्यक्ष हैं, जबकि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री इसके उपाध्यक्ष हैं।
सीएम विजय ने गृह मंत्री के सामने रखी NEET पर बात
विजय ने मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए होने वाली केंद्रीकृत NEET परीक्षा का विरोध करते हुए इसे गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु लगातार यह कहता रहा है कि NEET ग्रामीण पृष्ठभूमि और सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़े समुदायों के छात्रों को समान स्थिति में नहीं रखता।
उन्होंने कहा कि इससे स्कूली शिक्षा पर आधारित राज्य की समावेशी प्रवेश व्यवस्था प्रभावित होगी। विजय ने केंद्र सरकार से तमिलनाडु को MBBS, BDS और आयुष पाठ्यक्रमों में राज्य कोटे की सभी सीटों पर केवल 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर दाखिला देने की अनुमति देने का आग्रह किया।
परिसीमन को लेकर विजय की मांग
केंद्र के प्रस्तावित परिसीमन को लेकर विजय ने कहा कि आबादी को नियंत्रित करने में सफलता हासिल करने वाले दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से स्पष्ट कानूनी आश्वासन देने की मांग की कि जनसंख्या स्थिरीकरण में सफलता के कारण संसद में किसी भी राज्य के प्रतिनिधित्व के प्रतिशत में कमी नहीं होगी।
केंद्र का कहना है कि प्रस्तावित परिसीमन के तहत किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं की जाएंगी। सरकार संसद में परिसीमन विधेयक पारित कराने की कोशिश कर रही है, लेकिन अभी तक इसमें सफलता नहीं मिली है।
कावेरी जल विवाद पर भी रखा पक्ष
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की मौजूदगी में विजय ने कावेरी जल में तमिलनाडु के हिस्से की भी जोरदार पैरवी की। उन्होंने कहा कि नदी के बहाव पर निर्भर निचले इलाकों वाले राज्यों के जायज अधिकारों और लोगों की आजीविका की पूरी तरह सुरक्षा होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों, उचित तरीके से गठित ट्रिब्यूनल के आदेशों और नदी प्रबंधन के लिए बनाए गए कानूनी तंत्र को पूरी तरह और उनकी वास्तविक भावना के साथ लागू किया जाना चाहिए।
दक्षिणी राज्यों के लिए वित्तीय न्याय की मांग
न्यायसंगत वित्तीय संघवाद की मांग करते हुए विजय ने कहा कि दक्षिणी राज्य राष्ट्रीय विकास को गति देते हैं और उन्हें उनका उचित हिस्सा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत अगले वित्त आयोग की तैयारी कर रहा है, इसलिए वित्तीय हस्तांतरण के ढांचे में जरूरत और प्रदर्शन दोनों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विकास, वित्तीय अनुशासन और जनसांख्यिकीय बदलाव के क्षेत्र में निवेश करने वाले राज्यों को नुकसान नहीं होना चाहिए। विजय ने कहा कि दक्षिणी राज्य विशेष व्यवहार नहीं, बल्कि निष्पक्ष और समान व्यवहार चाहते हैं।
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना के साथ केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप शामिल हैं।
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