वोट चोरी के खिलाफ कांग्रेस की महारैली में 10 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य, 1 नवंबर को दिल्ली में आयोजन

HIGHLIGHTS
- उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के मुताबिक, राज्य से 50 हजार लोगों को लाने का लक्ष्य मिला है।
- हरियाणा की कांग्रेस इकाई को रैली में एक से डेढ़ लाख लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य दिया गया है।
- 30 अक्टूबर को प्रस्तावित मॉक संसद में आईएनडीआईए गठबंधन के सांसदों को भी आमंत्रित करने की योजना है।
नई दिल्ली। कांग्रेस एक नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली वोट चोरी के खिलाफ प्रस्तावित महारैली को लेकर भाजपा के सियासी हमलों को इसकी सफलता का संकेत मान रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने रैली में 10 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा है। साथ ही, मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने की लड़ाई को और तेज करने का ऐलान किया है। रैली में भीड़ जुटाने के लिए दिल्ली के आसपास के राज्यों हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और पंजाब पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कांग्रेस लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए राज्यों के नेताओं के साथ लगातार बैठकें कर रही है। रैली से पहले इसकी तैयारियों को धार देने के लिए कुछ राजनीतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इसी कड़ी में 30 अक्टूबर को मॉक संसद बुलाने की योजना है। इसमें ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक 'महाभियोग प्रस्ताव' पारित कराकर विरोध को और मुखर करने की तैयारी है।
अशोक होटल में प्रस्तावित मॉक संसद में कांग्रेस के अलावा विपक्षी गठबंधन आईएनडीआईए के सांसदों को भी आमंत्रित किया जाएगा।
विपक्षी दलों ने सितंबर के आखिर में वोट चोरी के खिलाफ बड़े स्तर पर साझा लड़ाई लड़ने का ऐलान किया था। रामलीला मैदान की रैली पांच सभाओं की श्रृंखला का पहला कार्यक्रम है। आईएनडीआईए का नेतृत्व कर रही कांग्रेस के लिए यह अपनी राजनीतिक क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर भी है।
ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस, उद्धव ठाकरे की शिवसेना और शरद पवार की एनसीपी जैसे विपक्षी खेमे के प्रमुख क्षेत्रीय दलों में हाल के समय में हुई टूट के बाद विपक्षी राजनीति को व्यवस्थित रखने की जिम्मेदारी कांग्रेस पर और बढ़ गई है।
इस रैली में विपक्षी गठबंधन के लगभग सभी प्रमुख नेता शामिल होंगे। ऐसे में कांग्रेस अपने सहयोगी दलों के सामने अपनी राजनीतिक क्षमता का संदेश देने का मौका नहीं गंवाना चाहती। बड़ी संख्या में लोगों को जुटाने के पीछे एक मकसद ज्ञानेश कुमार पर इस्तीफे का दबाव बढ़ाना भी है।
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल पिछले कई दिनों से राज्यों के नेताओं के साथ बैठकें कर तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। शुक्रवार को उन्होंने हरियाणा और उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कीं।
उत्तर प्रदेश के नेताओं के साथ हुई बैठक में पार्टी सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद थीं। हरियाणा के नेताओं को रैली में एक से डेढ़ लाख लोगों को लाने का लक्ष्य दिया गया है। बैठक में शामिल उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने बताया कि राज्य से 50 हजार लोगों को जुटाने का लक्ष्य मिला है और इसे पूरा किया जाएगा।
राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के साथ बिहार, झारखंड, ओडिशा, बंगाल तथा दक्षिण और पश्चिम भारत के राज्यों की कांग्रेस इकाइयों को भी लोगों को जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
शनिवार को वेणुगोपाल ने कांग्रेस सेवा दल के प्रमुख वीबी श्रीनिवास, महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा, युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब और एनएसयूआई प्रमुख विनोद जाखड़ के साथ बैठक की। इसमें रैली में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
वेणुगोपाल ने कहा, "हमें उम्मीद है कि कम से कम 10 लाख नागरिक रामलीला मैदान में ज्ञानेश एंड कंपनी द्वारा अंजाम दिए गए ‘वोट चोरी’ के आपराधिक कृत्य के खिलाफ हमारे ऐतिहासिक कार्यक्रम का हिस्सा होंगे। इससे भारत के हर कोने में कड़ा संदेश जाएगा कि हम अपने लोकतंत्र की रक्षा करने और इन ‘वोट चोरों’ को सत्ता से बाहर करने के लिए एकजुट हैं।"
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