1 नवंबर को दिल्ली में कांग्रेस की महारैली, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन को धार देने की तैयारी

HIGHLIGHTS
- कांग्रेस ने अभियान के समन्वय और निगरानी के लिए 208 एआईसीसी पर्यवेक्षक नियुक्त किए।
- पार्टी नेतृत्व आंदोलन की गतिविधियों पर सीधे नजर रखेगा।
- एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करने की योजना है।
नई दिल्ली। चुनाव आयोग की विवादित एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही कांग्रेस इस आंदोलन के जरिए अपने संगठन को सक्रिय करने और उसकी ताकत बढ़ाने की कोशिश में भी जुटी है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर शुरू किए गए ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के संचालन और जमीनी स्तर पर निगरानी के लिए पार्टी ने 200 से अधिक एआईसीसी पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। इस फैसले को कांग्रेस की संगठनात्मक सक्रियता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
इससे यह भी संकेत मिलता है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के दावे को जनता तक पहुंचाने के लिए पार्टी अपने नेताओं और संगठन की सक्रिय भागीदारी को जरूरी मान रही है।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन को आगे बढ़ाने में जुटी कांग्रेस
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली से लेकर विभिन्न राज्यों तक हो रहे विरोध प्रदर्शनों में कांग्रेस नेताओं की भागीदारी और सक्रियता पर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व सीधे नजर रख रहा है। एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चल रहा यह अभियान पार्टी के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसे एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट चोरी’ के खिलाफ बड़ी रैली आयोजित करनी है।
इस रैली में आईएनडीआईए गठबंधन के प्रमुख नेताओं को भी आमंत्रित किया जाएगा। इसके साथ ही कांग्रेस विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को जुटाने की कोशिश करेगी, जिनके नाम एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी के नेतृत्व में पिछले सप्ताह ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने से जो राजनीतिक माहौल बना है, कांग्रेस नेतृत्व उसे कमजोर नहीं पड़ने देना चाहता।
इसी रणनीति के तहत कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्षी नेताओं के लिए राहुल गांधी की ओर से आयोजित चाय बैठक के अगले दिन पार्टी के प्रमुख नेताओं के साथ मार्च की सफलता और आगे की रणनीति पर चर्चा की।
इस बैठक में राहुल गांधी भी शामिल हुए। बैठक के दौरान ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान की शीर्ष स्तर पर निगरानी करने के साथ ही इसे जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए तत्काल कदम उठाने का फैसला लिया गया।
रामलीला मैदान में एक नवंबर को बड़ी रैली की तैयारी
बैठक के बाद कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने अभियान के समन्वय, पर्यवेक्षण और निगरानी के लिए पार्टी के 208 नेताओं को एआईसीसी पर्यवेक्षक नियुक्त करने की घोषणा की।
विभिन्न राज्यों में इतनी बड़ी संख्या में पर्यवेक्षकों की तैनाती का उद्देश्य एसआईआर और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन को जमीनी स्तर तक पहुंचाना और उसका दायरा बढ़ाना है।
इसी क्रम में अधीर रंजन चौधरी, पृथ्वीराज चव्हाण, अविनाश पांडे, राजीव शुक्ला, नाना पटोले, डॉ. अजय कुमार और अजय कुमार लल्लू समेत लगभग सभी राज्यों के कई वरिष्ठ नेताओं को पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पर्यवेक्षकों को जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शनों को प्रभावी ढंग से संचालित कराने और प्रदेश के नेताओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का दायित्व दिया गया है।
इसके अलावा, पर्यवेक्षक अपने-अपने प्रभार वाले राज्यों और जिलों में आंदोलन की गतिविधियों तथा नेताओं की भागीदारी से संबंधित रिपोर्ट भी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को सौंपेंगे।
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