H-1B वीजा धारकों को 'बंधुआ मजदूर' कहने पर जेडी वेंस ने मानी गलती, दी सफाई

HIGHLIGHTS
- भारतीय-अमेरिकी नागरिक के सवाल पर वेंस ने दी सफाई
- H-1B कर्मचारियों की नौकरी और कानूनी स्थिति को लेकर उठाए सवाल
- उषा वेंस के भारतीय मूल के माता-पिता का किया जिक्र
वाशिंगटन। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माना है कि H-1B वीजा पर काम करने वाले विदेशी पेशेवरों को 'बंधुआ मजदूर' कहना उनके शब्दों का गलत चयन था। भारत सरकार और विदेश मंत्रालय की ओर से इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताए जाने के बाद वेंस ने अपनी बात स्पष्ट की है। भारत ने इस शब्दावली को बेहद आपत्तिजनक और औपनिवेशिक विरासत की याद दिलाने वाला बताया था।
शनिवार को CBS न्यूज के टाउन हॉल कार्यक्रम में वेंस ने कहा कि उनकी आलोचना H-1B वीजा पर काम करने वाले कर्मचारियों को लेकर नहीं थी, बल्कि अमेरिकी कंपनियों और मौजूदा वीजा व्यवस्था के संदर्भ में थी।
अपनी गलती स्वीकार कर वेंस ने दी सफाई
टाउन हॉल कार्यक्रम के दौरान एक भारतीय-अमेरिकी नागरिक के सवाल का जवाब देते हुए वेंस ने अपने शब्दों की जिम्मेदारी स्वीकार की। उन्होंने कहा कि अगर उनके शब्दों का चयन गलत था, तो इसकी जिम्मेदारी उनकी है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी H-1B वीजा धारकों की आलोचना के लिए नहीं थी। उनके मुताबिक, इस शब्द का इस्तेमाल उन कंपनियों की आलोचना के संदर्भ में किया गया था, जो कर्मचारियों को ऐसी स्थिति में रखती हैं।
वेंस ने कहा कि मौजूदा H-1B वीजा व्यवस्था विदेशी कर्मचारियों को कमजोर स्थिति में डाल देती है, क्योंकि अमेरिका में उनका कानूनी दर्जा पूरी तरह उनके नियोक्ता पर निर्भर करता है। नौकरी जाने के डर से कर्मचारी अपने बॉस के खिलाफ असहमति या शिकायत जाहिर करने से बचते हैं। इसकी वजह यह है कि नौकरी छूटने पर उन्हें अपने देश वापस लौटना पड़ सकता है।
वेंस के अनुसार, इस व्यवस्था के कारण कंपनियों को कर्मचारियों पर जरूरत से ज्यादा नियंत्रण और अनुचित अधिकार मिल जाते हैं।
वेंस ने अपने परिवार का भी किया जिक्र
प्रवासन को लेकर अपना रुख स्पष्ट करते हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने अपने परिवार का उदाहरण भी दिया। उन्होंने अपनी पत्नी उषा वेंस के माता-पिता का जिक्र करते हुए कहा कि उनका परिवार दक्षिण भारत से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि उनकी सास और ससुर दक्षिण भारत से अमेरिका आए थे और उनकी बेटी का जन्म अमेरिका में हुआ, जो आज देश की सेकंड लेडी हैं। वेंस ने कहा कि उन्हें अपने ससुराल पक्ष पर गर्व है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य कभी भी प्रवासियों को अमानवीय रूप में पेश करना नहीं रहा है। वेंस के मुताबिक, अमेरिका को विदेशी पेशेवरों का स्वागत करने और अपने स्थानीय कामगारों के हितों की रक्षा करने के बीच संतुलन बनाना होगा।
विदेश मंत्रालय ने जताई थी कड़ी आपत्ति
वेंस की सफाई भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से इस टिप्पणी पर आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद सामने आई है। मंत्रालय ने इस तरह की भाषा को अनुचित और आपत्तिजनक बताया था।
भारत ने कहा था कि ऐसी टिप्पणियां अमेरिकी अर्थव्यवस्था, तकनीकी नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में भारतीय पेशेवरों के महत्वपूर्ण योगदान को नजरअंदाज करती हैं।
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा था कि प्रतिभाओं की निर्बाध आवाजाही भारत और अमेरिका, दोनों के हित में है। इससे भारतीय पेशेवरों को वैश्विक स्तर पर अवसर मिलते हैं, जबकि अमेरिकी कंपनियों को कुशल और प्रतिस्पर्धी कार्यबल उपलब्ध होता है।
PERM प्रोग्राम से आठ कंपनियों के निलंबन का मामला
इसी महीने की शुरुआत में वेंस ने आरोप लगाया था कि आउटसोर्सिंग कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों के मुकाबले विदेशी पेशेवरों को 20,000 से 48,000 डॉलर तक कम वेतन देकर नियुक्त कर रही हैं।
इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने आठ प्रमुख आईटी और टेक कंपनियों—टीसीएस (TCS), इंफोसिस, विप्रो, एचसीएलटेक (HCLTech), कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब—को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) कार्यक्रम से निलंबित कर दिया था।
इस मामले पर विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि PERM कार्यक्रम का निलंबन रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया से जुड़ा एक प्रशासनिक कदम है। इसका मौजूदा H-1B वीजा धारकों या उनके आश्रितों की कानूनी स्थिति पर सीधा असर नहीं पड़ता और न ही इससे उनके वीजा अमान्य होते हैं।
गौरतलब है कि अमेरिका में हर साल जारी होने वाली कुल H-1B याचिकाओं में 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी भारतीय पेशेवरों की होती है।
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