सड़क दुर्घटनाओं की रिपोर्ट में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा जवाब

HIGHLIGHTS
- सड़क दुर्घटना रिपोर्ट में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा।
- वर्ष 2025 की रिपोर्ट 30 जून 2026 तक जारी होनी थी।
- अवमानना याचिका पर 25 नवंबर तक जवाब देने का निर्देश।
नई दिल्ली। देश में वर्ष 2024 के दौरान कुल 4.7 लाख सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों में करीब 1.7 लाख लोगों की जान गई, जबकि 2.3 लाख लोग गंभीर रूप से घायल हुए। सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों का विश्लेषण करके ही हादसों को रोकने की योजनाएं और भविष्य की नीतियां तैयार की जा सकती हैं।
हालांकि, वर्ष 2025 में हुई सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित वार्षिक रिपोर्ट अब तक जारी नहीं की गई है। इस पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 17 अप्रैल 2025 को आदेश दिया था कि सड़क दुर्घटनाओं की वार्षिक रिपोर्ट प्रत्येक वर्ष समाप्त होने के छह महीने के भीतर प्रकाशित की जाए।
रिपोर्ट जारी करने में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
सड़क दुर्घटनाओं की वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करने में हो रही देरी को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि वार्षिक रिपोर्ट समय पर प्रकाशित करने के आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ। साथ ही, केंद्र सरकार से इस संबंध में उसका प्रस्ताव भी पूछा गया है। अदालत ने अवमानना याचिका पर 25 नवंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा है।
न्यायमूर्ति जेबी पार्डीवाला और केवी विश्वनाथन की पीठ ने गत शुक्रवार को वकील केसी जैन की ओर से दायर अवमानना याचिका पर यह नोटिस जारी किया। सुनवाई के दौरान जैन ने स्वयं पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि वर्ष 2025 की सड़क दुर्घटनाओं की वार्षिक रिपोर्ट अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष ही इसे हर साल छह महीने के भीतर जारी करने का निर्देश दिया था।
इस आदेश के अनुसार, वर्ष 2025 की रिपोर्ट 30 जून 2026 तक प्रकाशित हो जानी चाहिए थी। जैन ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं की वार्षिक रिपोर्ट का वास्तविक लाभ तभी मिल सकता है, जब उसे निर्धारित समय पर जारी किया जाए।
समय पर आंकड़े नहीं मिलने से दुर्घटनाओं की रोकथाम में बाधा
वर्ष 2024 की सड़क दुर्घटना रिपोर्ट भी करीब एक साल की देरी से प्रकाशित हुई थी। जैन ने सवाल उठाया कि यदि दुर्घटनाओं से जुड़े आंकड़े समय पर उपलब्ध नहीं होंगे, तो हादसों को रोकने के लिए प्रभावी कदम कैसे उठाए जा सकेंगे। उनकी दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर आदेश के अनुपालन पर जवाब मांगा।
जैन की याचिका में कहा गया है कि सड़क दुर्घटनाओं की वार्षिक रिपोर्ट केवल सरकारी आंकड़ों का संग्रह नहीं है। इसके माध्यम से यह जानकारी मिलती है कि किन राज्यों, जिलों और सड़कों पर सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं हो रही हैं। साथ ही, हादसों के प्रमुख कारणों और उन्हें रोकने के लिए तत्काल आवश्यक कदमों की भी पहचान की जा सकती है।
इन आंकड़ों के आधार पर केंद्र और राज्य सरकारें, पुलिस, नगर निकाय, लोक निर्माण विभाग तथा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान कर जरूरी सुधार कर सकते हैं।
आगरा में भारी वाहनों से होने वाली मौतों का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
आगरा में भारी वाहनों के कारण हो रही मौतों का मुद्दा भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शहर में 400 करोड़ रुपये की लागत से उत्तरी बाईपास बनने और उसके चालू होने के बावजूद भारी वाहन शहर के अंदर से गुजर रहे हैं। ऐसे वाहनों की आवाजाही अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बनती है। इस मामले को उठाने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित प्राधिकरण को नोटिस जारी किया है।
आगरा निवासी और सुप्रीम कोर्ट के वकील केसी जैन ने याचिका दाखिल कर बताया कि बाईपास उपलब्ध होने के बावजूद भारी वाहन शहर के भीतर से होकर निकलते हैं।
उन्होंने कहा कि आगरा का उत्तरी बाईपास 400 करोड़ रुपये की लागत से बनकर चालू हो चुका है। इसके बाद भी ऐसे भारी वाहन, जिन्हें आगरा में रुकने की आवश्यकता नहीं है, शहर के बीच से गुजर रहे हैं।
इस स्थिति से स्कूली बच्चों, मरीजों, पैदल चलने वालों, दोपहिया वाहन चालकों और अन्य वाहन चालकों सहित आम नागरिकों की जान पर लगातार खतरा बना हुआ है। मामले में दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी किया।
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