'बेहद जटिल स्थिति से निपट रहे...': प. एशिया संकट पर विदेश मंत्रालय के अहम अपडेट

पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच भारत ने शनिवार को ऊर्जा और माल के निर्बाध आवागमन को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर विशेष ध्यान दिया। सरकार ने बताया कि क्षेत्र की स्थिति अत्यंत जटिल है और इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर भी महसूस किया जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत लगातार सभी पक्षों के साथ संवाद कर रहा है और तनाव कम करने का आह्वान कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राथमिकता माल और ऊर्जा की आपूर्ति को बिना बाधा जारी रखना है और विशेषकर ऊर्जा और नागरिक ढांचे को हमले से बचाना है।
जायसवाल ने बताया कि भारत ने खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्यों, ईरान, अमेरिका और इस्राइल सहित सभी देशों के साथ विभिन्न राजनयिक चैनलों के माध्यम से लगातार संपर्क बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने समकक्षों से बात की है और विदेश मंत्री और भारत के दूतावास भी बातचीत में सक्रिय रूप से जुड़े हैं। इस प्रक्रिया में शिपिंग कंपनियों जैसी प्रमुख हितधारक चिंताओं को भी ध्यान में रखा गया है।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि दो भारतीय टैंकर, शिवालिक और नंदा देवी, होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं और अब भारत के बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। प्रत्येक जहाज में 46,000 मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी भरी हुई है, जिससे कुल मिलाकर 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
साथ ही, ईरानी नागरिकों और अन्य फंसे हुए नाविकों को सुरक्षित रूप से लौटाने के लिए चार्टर्ड उड़ान की व्यवस्था की गई। इस उड़ान में पर्यटक और राजनयिक तैनाती पर आए आईआरआईआईएस के चालक दल के गैर-जरूरी सदस्य भी शामिल थे।
ब्रिक्स देशों के बीच साझा रुख बनाने में चुनौती बनी हुई है। जायसवाल ने बताया कि ब्रिक्स के शेरपा चैनल और ऑनलाइन बैठकों के जरिए सदस्य देशों के बीच संवाद जारी है, लेकिन विभिन्न मतभेदों के कारण अभी तक पूर्ण सहमति नहीं बन पाई है। भारत इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहा है और सभी पक्षों के साथ समन्वय बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
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