परिसीमन विवाद: स्टालिन के विरोध पर भाजपा नेता का पलटवार

तमिलनाडु में परिसीमन को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। भाजपा नेता और एनडीएमए के पूर्व उपाध्यक्ष मर्री शशिधर रेड्डी ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा परिसीमन से जुड़े विधेयक की प्रति जलाने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित कदम बताते हुए कहा कि डीएमके का यह विरोध आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर किया गया है।
रेड्डी ने दावा किया कि चेन्नई में पिछले वर्ष मुख्यमंत्री स्टालिन की अगुवाई में हुई सर्वदलीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह आग्रह किया गया था कि 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों का आवंटन 2026 के बाद भी यथावत रखा जाए और इस पर संसद में स्पष्ट आश्वासन दिया जाए।
परिसीमन को लेकर क्या कहा गया
उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिसीमन प्रस्ताव का उद्देश्य 1971 के आधार पर सीटों के मौजूदा अनुपात में बदलाव करना नहीं है, बल्कि सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि करना है। उनका कहना है कि यह कदम लंबे समय से लंबित महिला आरक्षण को लागू करने के लिए जरूरी है।
रेड्डी ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर दशकों से राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी रही है, खासकर पूर्व यूपीए सरकार के दौरान, जिससे यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
दक्षिणी राज्यों पर असर के आरोपों पर जवाब
दक्षिणी राज्यों के खिलाफ साजिश के आरोपों को उन्होंने खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से राजनीतिक रूप से गलत व्याख्या है। उनके अनुसार, यह प्रस्ताव किसी राज्य के खिलाफ नहीं है बल्कि संसदीय प्रतिनिधित्व को संतुलित करने और महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में एक कदम है।
उन्होंने यह भी कहा कि एक दक्षिण भारतीय होने के नाते वे इस प्रस्ताव का समर्थन करते हैं और इसे सकारात्मक पहल मानते हैं। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह कदम राजनीतिक दृष्टि से एक दूरदर्शी निर्णय है।
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