पाकिस्तान को दोहरा झटका: सिंधु के बाद अब रावी का भी पानी रोकेगा भारत

सिंधु जल संधि को निलंबित करने के बाद भारत अब रावी नदी के भारत के हिस्से के पानी को पाकिस्तान जाने से रोकने की तैयारी में है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह योजना लागू हुई तो गर्मियों में पाकिस्तान का जल संकट और गंभीर हो सकता है। इस दिशा में शाहपुर कंडी बांध परियोजना लगभग पूरी हो चुकी है।
जम्मू-कश्मीर के मंत्री ने दी जानकारी
जम्मू-कश्मीर के मंत्री जावेद अहमद राना ने बताया कि सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद बांध के निर्माण में तेजी आई है और यह प्रोजेक्ट अब पूरा होने के करीब है। राना ने कहा कि बांध बनने के बाद रावी नदी के अतिरिक्त पानी को पाकिस्तान की ओर जाने से रोका जा सकेगा और इसे सूखाग्रस्त कठुआ और सांबा जिलों में डायवर्ट किया जा सकेगा।
उन्होंने मीडिया से कहा, “पाकिस्तान को जाने वाला अतिरिक्त पानी रोका जाएगा। कठुआ और सांबा जिले सूखाग्रस्त हैं और यह प्रोजेक्ट हमारी प्राथमिकता में शामिल है। यह कंडी इलाके में बनाया जा रहा है।”
बांध का निर्माण मार्च 2026 तक पूरा होने की संभावना है।
शाहपुर कंडी प्रोजेक्ट की खास बातें
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रावी नदी का भारत हिस्सा पहले पाकिस्तान की ओर बह जाता था।
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बांध बनने के बाद इस पानी को पंजाब और जम्मू-कश्मीर के सूखाग्रस्त क्षेत्रों की सिंचाई में इस्तेमाल किया जाएगा।
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यह योजना 1979 में बनाई गई थी और 1982 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसकी आधारशिला रखी।
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पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच विवाद के कारण कार्य कई सालों तक रुका रहा।
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2008 में इसे राष्ट्रीय प्रोजेक्ट घोषित किया गया।
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कुल लागत: 3394 करोड़ रुपये (पंजाब: 2694 करोड़, केंद्र: 700 करोड़)
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बांध की ऊंचाई: 55 मीटर, लंबाई: 7.7 किलोमीटर
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सिंचाई क्षमता: पंजाब में 5000 हेक्टेयर, जम्मू में 32,000 हेक्टेयर से अधिक
पूर्व सिंचाई मंत्री ताज मोहिदीन ने कहा कि सिंधु जल संधि रावी नदी के पानी पर भारत के अधिकार को नियंत्रित नहीं करती।
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