ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि, रूस से तेल आयात पर कोई रोक नहीं: सरकार

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे के बावजूद कि भारत रूस से तेल आयात रोक देगा, सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे किसी निर्णय पर देश की प्राथमिकता अपनी ऊर्जा सुरक्षा और जरूरतों के अनुसार ही होगी।
संसद में बुधवार को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा उपलब्धता सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में विविध स्रोतों पर निर्भर रहना भारत की रणनीति का हिस्सा है। हालांकि उन्होंने किसी देश से तेल आयात रोकने का कोई संकेत नहीं दिया।
भारत-रूस तेल व्यापार:
विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार में खरीदार और विक्रेता के रिश्ते अचानक नहीं बदल सकते। रूस से तेल की पूरी मात्रा की जगह वेनेजुएला या अमेरिका से लेना व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण है। क्रेमलिन ने भी स्पष्ट किया कि उसे भारत की तरफ से रूस से तेल खरीद बंद करने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं मिला है।
दिसंबर 2025 में भारत ने रूस से औसतन 13.8 लाख बैरल प्रति दिन तेल आयात किया, जो कुल आयात का 27.4 प्रतिशत था। जनवरी 2026 में यह मात्रा और कम हो सकती है। ध्यान देने योग्य है कि भारत पर जुलाई 2025 में रूस से तेल पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने के बावजूद आयात रोकने का कोई कदम नहीं उठाया गया।
एसबीआई रिपोर्ट और विकल्प:
एसबीआई की हालिया रिपोर्ट के अनुसार रूस से तेल आयात घट रहा है, लेकिन भारत पूरी तरह से रोक नहीं सकता। भारत ने पारंपरिक तौर पर रूस से लगभग डेढ़-दो प्रतिशत क्रूड आयात किया है, जो यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़कर 8-10 प्रतिशत तक पहुंच गया।
वहीं, वेनेजुएला से तेल खरीदना सस्ता तो हो सकता है, लेकिन शिपिंग, बीमा और रिफाइनिंग की लागत ज्यादा होने के कारण फिलहाल विकल्प सीमित है।
तेल इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया:
उद्योग सूत्रों का कहना है कि तेल की ट्रेडिंग डील आमतौर पर छह-आठ हफ्ते पहले तय हो जाती है। मार्च तक रूस से जो तेल खरीदना है, उसका सौदा पहले ही हो चुका है। अभी सरकार की तरफ से किसी देश से तेल आयात रोकने या जारी रखने का निर्देश नहीं आया है, और कारोबारी हितों को ध्यान में रखकर ही निर्णय लिया जा रहा है।
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