पश्चिम एशिया संकट पर विपक्ष का साथ चाहती है सरकार, बुलाई सर्वदलीय बैठक

HIGHLIGHTS
- पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण उत्पन्न हालात पर चर्चा और उससे निपटने के लिए साझा रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाने का निर्णय लिया है।
- यह बैठक बुधवार शाम पांच बजे आयोजित की जाएगी, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के प्रमुख नेताओं के शामिल होने की संभावना है।
- राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में पैदा हुआ संकट कई पहलुओं से जुड़ा हुआ है और इसके प्रभाव लंबे समय तक महसूस किए जा सकते हैं।
- उन्होंने कहा क…
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण उत्पन्न हालात पर चर्चा और उससे निपटने के लिए साझा रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। यह बैठक बुधवार शाम पांच बजे आयोजित की जाएगी, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के प्रमुख नेताओं के शामिल होने की संभावना है।
राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में पैदा हुआ संकट कई पहलुओं से जुड़ा हुआ है और इसके प्रभाव लंबे समय तक महसूस किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में देश के सभी राजनीतिक दलों को मिलकर स्थिति का सामना करना चाहिए और सामूहिक प्रयासों पर जोर देना जरूरी है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, बैठक में सत्तारूढ़ भाजपा और उसके राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी दलों के साथ-साथ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता भी हिस्सा लेंगे। बैठक के दौरान पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के विभिन्न पहलुओं, उसके भारत पर संभावित प्रभाव और उससे निपटने की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
सरकार की ओर से यह भी कोशिश की जाएगी कि विपक्ष के सुझावों को ध्यान में रखते हुए एक साझा दृष्टिकोण तैयार किया जाए, ताकि संकट के दौर में देश एकजुट होकर कदम उठा सके।
गौरतलब है कि इससे पहले कोविड-19 महामारी के दौरान भी केंद्र सरकार ने इसी तरह की सर्वदलीय बैठकों का आयोजन किया था। उस समय सभी राजनीतिक दलों को साथ लेकर महामारी से निपटने के लिए समन्वित प्रयास किए गए थे।
कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ लगातार बैठकें कर स्थिति की समीक्षा की थी और राज्यों से सक्रिय भागीदारी की अपील की थी। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए भी प्रधानमंत्री ने राज्यों से सहयोग और सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया है, ताकि किसी भी चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
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