हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अब कर्नाटक में फिर से चलेंगी बाइक टैक्सी सेवाएं

बंगलूरू समेत पूरे कर्नाटक में बाइक टैक्सी सेवाओं को फिर से संचालित करने की मंजूरी मिल गई है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने उस पहले के आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत Rapido, Ola और Uber जैसी कंपनियों की बाइक टैक्सी सेवाएं बंद हो गई थीं। अदालत के इस फैसले से हजारों राइडर्स और एग्रीगेटर कंपनियों को बड़ी राहत मिली है।
कौनसी याचिकाओं पर आया फैसला
मुख्य न्यायाधीश विभु बखरू और न्यायमूर्ति सीएम जोशी की डिवीजन बेंच ने ऊबर इंडिया, Rapido, Ola बाइक टैक्सी ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन और व्यक्तिगत बाइक टैक्सी चालकों की ओर से दायर अपीलों को स्वीकार किया। अदालत ने राज्य के परिवहन अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे मोटरसाइकिलों को परिवहन वाहन के रूप में रजिस्टर करें और कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट जारी करें।
अदालत का आदेश
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बाइक टैक्सी मालिक अपने वाहनों को परिवहन श्रेणी में रजिस्टर कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं और राज्य सरकार को इन आवेदनों पर विचार करना होगा। केवल इस आधार पर आवेदन अस्वीकार नहीं किया जा सकता कि मोटरसाइकिलें परिवहन वाहन या कॉन्ट्रैक्ट कैरिज नहीं बन सकतीं। अदालत ने यह भी कहा कि क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण आवश्यक शर्तें लागू कर सकता है।
पहले क्यों लगा था प्रतिबंध
2 अप्रैल 2025 को सिंगल जज बेंच ने आदेश दिया था कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 93 के तहत स्पष्ट दिशा-निर्देश और राज्य नियम बनने तक बाइक टैक्सी एग्रीगेटर्स सेवाएं नहीं चला सकते। इसके तहत Rapido, Ola और Uber को अपनी सेवाएं बंद करने को कहा गया था, और बाद में इस समय सीमा को 15 जून 2025 तक बढ़ा दिया गया था।
डिवीजन बेंच ने क्यों पलटा फैसला
न्यायालय ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम दोपहिया वाहनों को कॉन्ट्रैक्ट कैरिज के रूप में संचालन की अनुमति देता है। इसलिए अधिकारी रजिस्ट्रेशन या परमिट देने से इनकार नहीं कर सकते। साथ ही, राज्य सरकार को मौजूदा नियमों के तहत एग्रीगेटर्स के लिए अतिरिक्त शर्तें तय करने की स्वतंत्रता दी गई है।
राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं की दलीलें
राज्य सरकार ने तर्क दिया कि बाइक टैक्सी पर रोक एक नीतिगत फैसला है, जिसमें ऑटो और टैक्सी यूनियनों का विरोध, कानून-व्यवस्था की चिंताएं और महिलाओं की सुरक्षा शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि केंद्रीय कानून मोटरसाइकिलों को कॉन्ट्रैक्ट कैरिज के रूप में अनुमति देता है, इसलिए राज्य सरकार नीति के नाम पर रजिस्ट्रेशन और परमिट देने से इनकार नहीं कर सकती। उन्होंने यह भी कहा कि 2024 में इलेक्ट्रिक बाइक टैक्सी स्कीम को वापस लेना किसी अध्ययन के आधार पर नहीं बल्कि राजनीतिक और कानून-व्यवस्था कारणों से किया गया।
अंतरिम राहत पहले ही मिल चुकी थी
अगस्त 2025 में कोर्ट ने मौखिक रूप से निर्देश दिया था कि अपील लंबित रहने तक बाइक टैक्सी चालकों के खिलाफ कोई जबरदस्ती कार्रवाई न की जाए और उन्हें परेशान न किया जाए।
शहरी परिवहन और रोजगार को मिलेगा लाभ
इस फैसले से बंगलूरू और राज्य के अन्य हिस्सों में बाइक टैक्सी सेवाओं से जुड़े हजारों लोगों को रोजगार और राहत मिलने की उम्मीद है। कंपनियों का कहना है कि बाइक टैक्सी न केवल रोजगार का बड़ा जरिया हैं, बल्कि शहरी लास्ट-माइल कनेक्टिविटी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
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