इस्राइली विदेश मंत्री ने एस जयशंकर से की बात; होर्मुज पर हुई चर्चा

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और इस्राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार के बीच मंगलवार को एक अहम द्विपक्षीय वार्ता हुई। इस बातचीत में पश्चिम एशिया की मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति, ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और लेबनान में जारी हालात जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा
वार्ता के बाद इस्राइली विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने अमेरिकी रुख को इस दिशा में निर्णायक बताते हुए कहा कि ईरान में यूरेनियम संवर्धन को रोकना और पहले से मौजूद संवर्धित सामग्री को बाहर ले जाना वैश्विक चिंता का विषय है, जिस पर सख्त कदम आवश्यक हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर चिंता
गिदोन सार ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की गतिविधियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समुद्री मार्गों में बाधा डालने और वैश्विक व्यापार को प्रभावित करने के प्रयास “आर्थिक अस्थिरता” को बढ़ावा देते हैं। ऐसे में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिक जिम्मेदारी है, खासकर उन देशों के लिए जिनकी अर्थव्यवस्था समुद्री व्यापार पर निर्भर है, जिनमें भारत और खाड़ी क्षेत्र के साझेदार देश शामिल हैं।
जयशंकर को बताया ‘दोस्त’
इस्राइली विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर को अपना “दोस्त” बताया और बातचीत को सकारात्मक और उपयोगी करार दिया। उन्होंने कहा कि भारत-इस्राइल संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता इस वार्ता के जरिए और मजबूत हुई है। साथ ही भविष्य में भी नियमित संवाद जारी रखने पर सहमति बनी।
पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति
इधर पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के प्रयासों के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता असफल रहने के बाद क्षेत्र में अस्थिरता की आशंका और बढ़ गई है। इस बीच मिस्र, तुर्किये और पाकिस्तान जैसे देश अमेरिका-ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरू कराने के लिए कूटनीतिक प्रयासों में जुटे हुए हैं।
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