कर्नाटक: इस्तीफे की मांग पर बी नागेंद्र का पलटवार, बोले- दलित हूं इसलिए निशाना बना रहा विपक्ष

HIGHLIGHTS
- मंत्री ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को सिर्फ आरोप बताया
- नागेंद्र ने कहा, दोष साबित होने पर अदालत का फैसला स्वीकार करेंगे
- कांग्रेस ने विपक्ष को विधानसभा में सबूत पेश करने की चुनौती दी
कर्नाटक के मंत्री बी नागेंद्र ने अपने इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष पर पलटवार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस से जुड़े होने और दलित होने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। नागेंद्र ने कहा कि जब केंद्र के मंत्रियों और सांसदों पर भी मामले दर्ज हैं, तो सिर्फ उनसे इस्तीफा क्यों मांगा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि 326 लोगों में से 126 के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें अपहरण, दुष्कर्म, हत्या के प्रयास और यौन उत्पीड़न जैसे मामले भी शामिल हैं।
नागेंद्र ने लगाए राजनीतिक निशाना बनाए जाने के आरोप
नागेंद्र ने सत्तारूढ़ दल के नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि पहले उन 126 लोगों से इस्तीफा लिया जाना चाहिए। उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का नाम लेते हुए दावा किया कि उनके खिलाफ 29 मामले हैं। इसके साथ ही उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के इस्तीफे की भी मांग की।
नागेंद्र ने कहा कि वह जमीन से उठकर मेहनत के बल पर आगे बढ़े हैं और दलित होने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। अपने खिलाफ लगे आरोपों को लेकर उन्होंने कहा कि वह अदालत का रुख कर चुके हैं और उन्हें राहत मिली है। उनके अनुसार, अदालत ने उन्हें दोषी नहीं माना है और फिलहाल उनके खिलाफ सिर्फ आरोप हैं। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति खुद न्यायपालिका की भूमिका निभाकर उन्हें आरोपी या दोषी घोषित नहीं कर सकता। नागेंद्र ने संविधान में मिले मौलिक अधिकारों का भी उल्लेख किया।
अदालत के फैसले को स्वीकार करने की बात कही
मंत्री नागेंद्र ने कहा कि अगर अदालत उन्हें दोषी ठहराती है तो वह फैसला स्वीकार करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि न्यायपालिका उन्हें दोषी मानकर सजा देती है तो वह अदालत के सामने सिर झुकाएंगे।
इस बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का भी नागेंद्र को समर्थन मिला है। उनके राजनीतिक सचिव एएस पोन्नन्ना ने भाजपा को चुनौती दी कि वह नागेंद्र के खिलाफ आरोपों से जुड़े सबूत विधानसभा में पेश करे।
पोन्नन्ना ने प्रवर्तन निदेशालय को केंद्र और भाजपा का मुखपत्र बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार कर्नाटक पुलिस और अपराध जांच विभाग पर भरोसा करती है। उनके अनुसार, जांच अपराध जांच विभाग को सौंपे जाने के बाद नागेंद्र ने पारदर्शी जांच के लिए तत्काल इस्तीफा दिया था और जांच से खुद को अलग रखते हुए अधिकारियों के साथ सहयोग किया।
पोन्नन्ना ने दावा किया कि 79 करोड़ रुपये बरामद किए जा चुके हैं और बाकी 4-5 करोड़ रुपये से संबंधित विस्तृत रिकॉर्ड और दस्तावेज भी मौजूद हैं। उनके मुताबिक, निगम का एक भी रुपया नहीं खोया है। अदालत के आदेश के अनुसार बरामद 79 करोड़ रुपये वाल्मीकि निगम को लौटाए जाने हैं और यह रकम खातों में मौजूद है। उन्होंने भाजपा से कहा कि अगर उसके पास कोई सबूत है तो उसे विधानसभा में पेश किया जाए और सदन में चर्चा के दौरान सरकार को जवाब देने का मौका दिया जाए।
विपक्ष ने लगाए गंभीर आरोप
इससे पहले भाजपा नेताओं ने विधानसभा में काले शॉल पहनकर नागेंद्र को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने का विरोध किया था। सप्ताहांत में पार्टी नेताओं ने बेलगावी में धरना देकर भी नागेंद्र के इस्तीफे की मांग की। विधानसभा में लगातार दूसरे दिन विपक्ष ने नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग को लेकर हंगामा किया।
नागेंद्र पर कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में करोड़ों रुपये के कथित गबन से जुड़े आरोप हैं।
डीके शिवकुमार ने विपक्ष की मांग को खारिज करते हुए भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) के विरोध को राजनीतिक अस्तित्व बचाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को नोटिस देकर सदन में चर्चा करनी चाहिए और सरकार को यह बताना चाहिए कि नागेंद्र को क्यों हटाया जाना चाहिए।
शिवकुमार ने कहा कि कथित घोटाले में नागेंद्र की कोई भूमिका नहीं है। उनके अनुसार, करीब 84 करोड़ रुपये की कथित गबन राशि में से 79 करोड़ रुपये बरामद किए जा चुके हैं और नागेंद्र से कोई रकम बरामद नहीं हुई है।
नागेंद्र पहले भी दे चुके हैं इस्तीफा
नागेंद्र ने सिद्धारमैया सरकार में मंत्री रहते हुए आरोप लगने के बाद इस्तीफा दिया था। दो साल बाद उन्हें फिर मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। उन्हें 3 अगस्त को डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। वह फिलहाल योजना और सांख्यिकी मंत्री हैं।
प्रवर्तन निदेशालय ने जुलाई 2024 में बेल्लारी के विधायक नागेंद्र को वाल्मीकि निगम घोटाला मामले में गिरफ्तार किया था। बंगलूरू की विशेष अदालत ने अक्टूबर 2024 में उन्हें जमानत दे दी थी। प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की ओर से तैयार आरोपपत्रों में भी उनका नाम है।
डीके शिवकुमार ने एचडी कुमारस्वामी पर साधा निशाना
इस बीच, डीके शिवकुमार ने बंगलूरू दक्षिण जिले के बिदादी के पास ग्रेटर बंगलूरू एकीकृत टाउनशिप परियोजना के लिए किसानों की जमीन के अधिग्रहण के विरोध में जनता दल (सेक्युलर) के प्रदर्शन को लेकर केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी पर भी निशाना साधा।
उन्होंने सवाल किया कि जब उन्होंने कुमारस्वामी को चर्चा के लिए बुलाया था, तब वह क्यों नहीं आए। शिवकुमार ने कहा कि जनता दल (सेक्युलर) को विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए।
कुमारस्वामी के कथित रियल एस्टेट कारोबार वाले आरोप पर शिवकुमार ने पलटवार करते हुए कहा कि इसकी शुरुआत किसने की थी, कुमारस्वामी इसके 'पितामह' हैं। उन्होंने कहा कि सरकार रियल एस्टेट कारोबार नहीं करती, बल्कि उसका लक्ष्य जनता का कल्याण है।
शिवकुमार ने आरोप लगाया कि कुमारस्वामी और जनता दल (सेक्युलर) जनता का विकास नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि वे रामनगर, कनकपुरा, चन्नपटना और मगड़ी के लोगों का विकास नहीं चाहते।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वह बुधवार को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली जाएंगे। इसके बाद गुरुवार को तमिलनाडु के मामल्लपुरम में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में शामिल होंगे।
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