NEET-UG पेपर सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट में सरकार का जवाब, कहा- मौजूदा व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित

HIGHLIGHTS
- केंद्र ने माना कि प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप होता है।
- मॉडरेटर पहले 500 सवालों का प्रश्न बैंक तैयार करते हैं।
- चार अलग-अलग पेपर तैयार होने के बाद दो का चयन किया जाता है।
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नीट-यूजी परीक्षा आयोजित करने के लिए मौजूदा व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित है। हालांकि, सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि इस प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप होता है।
सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को प्रश्न-पत्र तैयार करने और उसकी सुरक्षा से जुड़ी प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने 100 प्रश्नों वाले फिजिक्स के पेपर का उदाहरण देते हुए बताया कि प्रश्न-पत्र किस तरह तैयार किए जाते हैं।
तुषार मेहता ने क्या बताया?
- सबसे पहले मॉडरेटर के कई समूह 500 प्रश्नों का एक बैंक तैयार करते हैं।
- इसके बाद दूसरे मॉडरेटर इसी बैंक से 100-100 प्रश्न चुनकर चार अलग-अलग प्रश्न-पत्र तैयार करते हैं।
- एनटीए के महानिदेशक इन चार प्रश्न-पत्रों में से दो का चयन करते हैं।
- इसके बाद प्रश्न-पत्रों को सीसीटीवी और सीआईएसएफ की सुरक्षा के बीच एक सीलबंद बॉक्स में दो अलग-अलग प्रिंटिंग प्रेस भेजा जाता है।
- बॉक्स के प्रभारी के पास एक डिजिटल चाबी होती है। प्रिंटिंग प्रेस का मालिक एनटीए के महानिदेशक से संपर्क करने और कोड मिलने के बाद ही बॉक्स खोला जा सकता है।
- बॉक्स खुलने के बाद किसी बाहरी व्यक्ति को प्रिंटिंग प्रेस में प्रवेश की अनुमति नहीं होती और पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती है।
सीलबंद लिफाफे में रखे जाते हैं प्रश्न-पत्र
तुषार मेहता ने आगे बताया कि प्रिंटिंग प्रेस में मौजूद व्यक्ति को भी यह जानकारी नहीं होती कि प्रश्न-पत्र किस परीक्षा केंद्र पर भेजे जाएंगे।
मेहता ने कहा कि प्रश्न-पत्र और ओएमआर शीट को सीलबंद लिफाफे में रखा जाता है। इस लिफाफे को खोलने के लिए उसकी सील तोड़नी पड़ती है।
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