सबरीमाला सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट में बड़ी सुनवाई

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की नौ न्यायाधीशों वाली बेंच 7 अप्रैल से धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के भेदभाव से जुड़े मामलों की सुनवाई शुरू करने जा रही है। इस सुनवाई में मुख्य रूप से केरल के सबरीमाला मंदिर से जुड़े विवादों पर ध्यान दिया जाएगा। कोर्ट ने सभी पक्षों को अपनी लिखित दलीलें 14 मार्च तक जमा करने का आदेश दिया है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार की ओर से बताया कि वह सबरीमाला फैसले की समीक्षा का समर्थन करते हैं। बेंच में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली शामिल हैं।
एमिकस क्यूरी और नोडल काउंसल नियुक्त
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील परमेश्वर और शिवम सिंह को एमिकस क्यूरी के रूप में नियुक्त किया है ताकि न्यायालय को आवश्यक मार्गदर्शन और पक्षों की दलीलों का विश्लेषण मिल सके। सुनवाई 22 अप्रैल तक पूरी होने का लक्ष्य रखा गया है।
सबरीमाला फैसले का समर्थन करने वाले पक्षों के लिए कृष्ण कुमार सिंह को नोडल काउंसल नियुक्त किया गया है, जबकि विरोधी पक्षों के लिए शश्वती परी को नोडल काउंसल बनाया गया है।
सियासी हलचल और पृष्ठभूमि
यह मामला इसलिए फिर चर्चा में आया है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट 2018 के सबरीमाला फैसले से जुड़ी समीक्षा और रिट याचिकाओं पर विचार करने वाली है। उस फैसले में हर उम्र की महिलाओं को भगवान अयप्पा के मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई थी। विपक्षी कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने इस संवेदनशील मुद्दे पर जनता के सामने स्पष्ट रुख नहीं रखा है।
सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई 2020 को स्पष्ट किया था कि पांच न्यायाधीशों की बेंच सीमित समीक्षा शक्तियों के तहत कानून के सवाल बड़े बेंच के समक्ष भेज सकती है। 2018 का सबरीमाला फैसला महिलाओं के मंदिर प्रवेश को अनुमति देने वाला महत्वपूर्ण निर्णय था।
अन्य धार्मिक स्थलों के मुद्दे भी शामिल
सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान के अनुच्छेद 25 एवं 26 के दायरे पर सात प्रमुख सवाल भी तैयार किए हैं। इनमें यह स्पष्ट किया गया कि धार्मिक समूहों या संप्रदायों की प्रथाओं को किसी अन्य व्यक्ति द्वारा जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से चुनौती दी जा सकती है या नहीं।
सबरीमाला के अलावा, बेंच ने मस्जिदों और दरगाहों में मुस्लिम महिलाओं के प्रवेश तथा पारसी महिलाओं के अगियारी (पवित्र अग्नि स्थल) में प्रवेश से जुड़े मामलों को भी बड़े बेंच के समक्ष भेजा है।
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