मेरठ में मौलाना अब्दुल्लाह मुगैसी सुपुर्द-ए-खाक, जनाजे में उमड़ी भीड़

मेरठ के मुंडाली क्षेत्र में रविवार को प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान मौलाना अब्दुल्लाह मुगैसी को अजराड़ा स्थित झंडा कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उनके जनाजे में विभिन्न वर्गों के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए और उन्हें अंतिम विदाई दी।
नमाज-ए-जनाजा उनके बेटे मौलाना अब्दुल मालिक ने अदा कराई। मौलाना मुगैसी मूल रूप से सहारनपुर जनपद के बेहट क्षेत्र के गांव घघरौली के रहने वाले थे। शनिवार देर शाम तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेरठ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
करीब छह दशकों तक उन्होंने अजराड़ा स्थित मदरसा गुलजार-ए-हुसैनिया के मोहतमिम के रूप में सेवाएं दीं। उन्हें मदरसे के संस्थापक हाफिज मुहम्मद हुसैन की कब्र के पास ही दफनाया गया।
मौलाना मुगैसी कई प्रमुख शैक्षणिक और धार्मिक संस्थानों से भी जुड़े रहे। वह दारुल उलूम देवबंद (वक्फ) की शूरा, मजाहिर उल उलूम सहारनपुर की मजलिस-ए-शूरा और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की कोर्ट के सदस्य रह चुके थे।
उनके निधन पर कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों ने शोक व्यक्त किया। अखिलेश यादव और मायावती ने सोशल मीडिया के जरिए संवेदना जताई।
जनाजे और दफन में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और विभिन्न दलों के नेता भी मौजूद रहे, जिन्होंने मौलाना के सामाजिक और शैक्षिक योगदान को याद किया।
मदरसे की जिम्मेदारी संभालेंगे मौलाना अब्दुल मालिक
मदरसा प्रबंधन से जुड़े मौलाना आस मोहम्मद गुलजार कासमी ने बताया कि मौलाना मुगैसी के इंतकाल के बाद उनके बेटे मौलाना अब्दुल मालिक को मदरसे का नया मोहतमिम नियुक्त किया जाएगा।
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