मेरठ सेंट्रल मार्केट विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, महिलाओं ने दाखिल की याचिका

मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में सेक्टर-2 की महिलाओं ने अपने हक से जुड़े मुद्दे को लेकर कानूनी लड़ाई तेज कर दी है। सोमवार को इन महिलाओं की ओर से अदालत में याचिका दाखिल की जाएगी।
अधिवक्ता से मुलाकात, दस्तावेज सौंपे
इससे पहले शनिवार को क्षेत्र की आठ महिलाएं दिल्ली पहुंचीं और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विवेक नारायण शर्मा से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने आधार कार्ड, संपत्ति की रजिस्ट्री और बिजली बिल जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज सौंपे और अपनी स्थिति से अवगत कराया।
याचिका में ऐतिहासिक तथ्यों का जिक्र
पूर्व पार्षद संजीव पुंडीर के साथ मिलकर तैयार की जा रही इस याचिका में कहा गया है कि 1986 में बनाए गए कई आवासीय मकानों में शुरुआत से ही सेट बैक का प्रावधान नहीं था।
महिलाओं का कहना है कि इन छोटे मकानों में सेट बैक छोड़ने से संरचना कमजोर हो सकती है और भवनों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। साथ ही यह भी तर्क दिया गया है कि इन आवासों को आजीविका के लिए छोटे व्यापार की अनुमति के साथ आवंटित किया गया था।
किसके नाम शामिल होंगे याचिका में
याचिका दाखिल करने वाली महिलाओं में लोकेश जैन, जगरोशनी, रिम्पी, प्रवेश रानी, यश देवी मनोचा, सुषमा, सुमन गोयल और प्रतिभा शर्मा शामिल हैं।
इनका कहना है कि इस याचिका के जरिए अल्प और कमजोर आय वर्ग के अन्य लोगों के हितों को भी अदालत के सामने रखा जाएगा।
प्रशासन की कार्रवाई जारी
आवास एवं विकास परिषद के अनुसार, 35 संपत्तियों में सेट बैक हटाने की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है, जबकि करीब 90 मामलों में अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई चल रही है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी को तकनीकी समस्या आती है तो उसका समाधान भी कराया जाएगा।
42 मकानों को राहत
विभाग के मुताबिक सेंट्रल मार्केट में 42 ऐसे मकान हैं, जिनमें शुरुआती योजना के तहत सेट बैक का प्रावधान ही नहीं था। इन भवनों में अब सेट बैक छोड़ने की अनिवार्यता नहीं होगी।
ये अधिकतर कोने पर स्थित छोटे आवास हैं, जिनका निर्माण सीमित स्थान में किया गया था।
नोटिस और कार्रवाई की स्थिति
स्कीम नंबर-7 के तहत अब तक 815 संपत्तियों पर नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इनमें से 710 पर नोटिस चस्पा भी किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, संबंधित लोगों को दो सप्ताह का समय दिया गया है। तय समय में कार्रवाई न होने पर जिला प्रशासन द्वारा ध्वस्तीकरण किया जाएगा और उसका खर्च भी मालिकों से वसूला जाएगा।
विरोध के बीच नोटिस प्रक्रिया
पिछले दिनों जब आवास विकास विभाग की टीम नोटिस लगाने पहुंची थी, तो स्थानीय महिलाओं ने इसका विरोध किया था और कुछ जगहों पर नोटिस फाड़ने की भी घटना सामने आई थी।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.






















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.