हिमाचल के सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से पढ़ाया जाएगा नैतिक विज्ञान, सीएम सुक्खू के निर्देश

HIGHLIGHTS
- बच्चों में अनुशासन, करुणा और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर जोर।
- सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू करने की प्रगति की समीक्षा।
- नए स्कूलों के संचालन के लिए शिक्षकों और कर्मचारियों की व्यवस्था के निर्देश।
शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने बच्चों में छोटी उम्र से ही नैतिक मूल्य, अनुशासन, करुणा, बड़ों के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए पहली कक्षा से नैतिक विज्ञान विषय शुरू करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण और उनके सर्वांगीण विकास पर भी ध्यान देना जरूरी है।
बैठक में सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू करने की प्रगति की समीक्षा भी की गई। मुख्यमंत्री ने योग्य शिक्षकों, पर्याप्त प्रशासनिक कर्मचारियों और पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
सीबीएसई स्कूलों में भर्ती प्रक्रिया तेज करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने सीबीएसई स्कूलों में 600 जूनियर बेसिक टीचर (जेबीटी) पदों पर भर्ती और तैनाती की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही 100 नए स्कूलों में शिक्षकों की व्यवस्था करने को भी कहा।
उन्होंने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि इन स्कूलों का संचालन सुचारू बनाए रखने के लिए कर्मचारियों की जरूरतों को योजनाबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
मुख्यमंत्री ने सीबीएसई स्कूलों में लिपिक वर्गीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की आवश्यकता की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कर्मचारियों की जरूरतों का आकलन करने और निर्धारित नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने को कहा।
3,900 शिक्षण और 900 गैर-शिक्षण पदों पर होगी भर्ती
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग की प्रमुख योजनाओं की समीक्षा की। इनमें नई योजना आधारित भर्ती के तहत 3,900 शिक्षण और 900 गैर-शिक्षण पदों को भरने की प्रक्रिया भी शामिल रही।
सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने और सरकारी स्कूलों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रभावी निगरानी और जवाबदेही के माध्यम से लिए गए फैसलों को समय पर लागू करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
बैठक में शिक्षा सचिव डॉ. यूनुस, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली और शिक्षा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
दृष्टिबाधितों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध प्रदेश सरकार: धनी राम शांडिल
हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल की अध्यक्षता में बुधवार को ब्लाइंड पर्सन्स एसोसिएशन और नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई। इसमें दृष्टिबाधितों के अधिकारों, शिक्षा, प्रशिक्षण और सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।
मंत्री ने कहा कि विभिन्न विभागों में दृष्टिबाधितों के लिए आरक्षित पदों को भरना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार सहित विभिन्न क्षेत्रों में दृष्टिबाधितों के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
डॉ. शांडिल ने कहा कि मुख्यमंत्री ऐसे संवेदनशील वर्गों के लिए विशेष योजनाएं, कार्यक्रम और नई पहल कर रहे हैं, जिन्हें सरकार के सहयोग और समर्थन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत है कि जरूरतमंद वर्गों को आवश्यक सुविधाएं मिलें।
बैठक के दौरान दृष्टिबाधित संघ और महासंघ की ओर से रखे गए विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई। मंत्री ने उनकी जायज मांगों को जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया।
इस बैठक में मुख्य सचिव केके पंत, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता सचिव सीपी वर्मा, शहरी विकास सचिव अमरजीत सिंह, निदेशक सुमित खिमटा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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