दिल्ली में प्रदूषण पर निगम सख्त, हर जोन के उपायुक्त रोजाना 4 घंटे करेंगे निरीक्षण

HIGHLIGHTS
- उपायुक्तों को रोजाना कम से कम चार घंटे फील्ड में बिताने होंगे।
- हर दिन शाम 5 बजे तक निरीक्षण की रिपोर्ट ईमेल करनी होगी।
- रिपोर्ट में खामियों, की गई कार्रवाई और जियो-टैग्ड तस्वीरों का ब्योरा देना होगा।
नई दिल्ली। सर्दियों में बढ़ते वायु प्रदूषण पर काबू पाने के लिए दिल्ली नगर निगम ने निगरानी व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। अब निगम के सभी जोन के उपायुक्त (डीसी) प्रतिदिन कम से कम चार घंटे फील्ड में रहकर प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े इंतजामों का जायजा लेंगे।
निरीक्षण के दौरान उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में सड़क की धूल, निर्माण कार्यों, कचरा जलाने और औद्योगिक प्रदूषण सहित प्रदूषण के अन्य स्रोतों पर नजर रखनी होगी। इस संबंध में निगम आयुक्त संजीव खिरवार ने आदेश जारी किए हैं।
सभी जोन के उपायुक्तों को करना होगा निरीक्षण
जारी आदेश के मुताबिक, प्रत्येक जोन के उपायुक्त को रोजाना अपने क्षेत्र में कम से कम चार घंटे निरीक्षण करना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है और सर्दियों में प्रदूषण नियंत्रण की अवधि तक जारी रहेगी।
यह फैसला 27 अक्टूबर को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई वायु प्रदूषण नियंत्रण संबंधी बैठक में दिए गए निर्देशों के आधार पर लिया गया है।
शाम पांच बजे तक भेजनी होगी निरीक्षण रिपोर्ट
उपायुक्तों को रोजाना शाम पांच बजे तक निरीक्षण की रिपोर्ट तय प्रारूप में अतिरिक्त आयुक्त (डीईएमएस) को ईमेल के माध्यम से भेजनी होगी। रिपोर्ट में निरीक्षण किए गए स्थानों, सामने आई कमियों और उन पर की गई कार्रवाई का ब्योरा देना होगा। इसके साथ जियो टैग की गई तस्वीरें भी लगानी होंगी।
अतिरिक्त आयुक्त सभी जोन से मिली रिपोर्ट को एकत्र कर दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग और ग्रीन वार रूम को भेजेंगे।
सड़क की धूल और निर्माण स्थलों पर रहेगी निगरानी
निरीक्षण के दौरान सड़कों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के उपायों की प्राथमिकता से जांच की जाएगी। इसमें मैकेनिकल रोड स्वीपिंग, पानी का छिड़काव, जमा धूल और गाद हटाने तथा सड़क किनारे और खाली जमीन पर हरियाली विकसित करने जैसे कार्य शामिल हैं।
निर्माण और तोड़फोड़ वाली जगहों पर भी यह देखा जाएगा कि धूल नियंत्रण के लिए निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
इसके अलावा खुले में कचरा, पत्तियां, बायोमास और अन्य ज्वलनशील सामग्री जलाने पर रोक सुनिश्चित करनी होगी। कचरे के नियमित उठान, परिवहन और निस्तारण की व्यवस्था भी जांच के दायरे में रहेगी।
अवैध रूप से प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों की पहचान कर संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
प्रदूषण हॉटस्पॉट के तीन किलोमीटर दायरे पर नजर
नगर निगम ने प्रदूषण के हॉटस्पॉट पर विशेष निगरानी रखने को कहा है। चिह्नित हॉटस्पॉट के आसपास तीन किलोमीटर के दायरे में प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।
इसके साथ ही साप्ताहिक बाजारों में अतिक्रमण के कारण लगने वाले जाम और उससे होने वाले प्रदूषण की भी जांच होगी। इस उद्देश्य से प्रत्येक जोन में सप्ताह में एक बार रात के समय बाजार का निरीक्षण करना अनिवार्य किया गया है।
शीतकालीन प्रतिबंधों के उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
एक नवंबर से लागू होने वाले शीतकालीन प्रतिबंधों का पालन कराने की जिम्मेदारी भी उपायुक्तों को सौंपी गई है। उन्हें 1 नवंबर 2026 से 20 फरवरी 2027 तक निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर लागू प्रतिबंधों की निगरानी करनी होगी।
वहीं, 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक लागू होने वाले अधिक सख्त प्रतिबंधों का पालन भी सुनिश्चित कराना होगा। ग्रेप के तहत जारी निर्देशों पर भी नजर रखी जाएगी।
नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लोगों या संस्थानों को नोटिस जारी करने, चालान काटने और नियमानुसार अन्य कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
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