जूना अखाड़ा के नारायण गिरी महाराज ने यूजीसी नियमों पर जताई आपत्ति

कानपुर। जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता नारायण गिरी महाराज ने बुधवार को कहा कि यूजीसी के माध्यम से शिक्षा संस्थानों में जातिवाद फैलाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ संशोधन का मामला नहीं है, बल्कि यूजीसी एक्ट को पूरी तरह वापस किया जाना चाहिए। महाराज ने छात्रों को जातियों में बांटने के कदम की कड़ी आलोचना की और कहा कि इससे समाज में बंटवारा बढ़ेगा।
नारायण गिरी महाराज मंगलवार रात कानपुर पहुंचे और परमट स्थित आनंदेश्वर मंदिर परिसर में ठहरे। उन्होंने कहा कि विधेयक ऐसा होना चाहिए जो सभी जातियों को समान रूप से जोड़ सके।
महाराज ने आनंदेश्वर कॉरिडोर के विकास को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि मंदिर के जीर्णोद्धार में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की कोई रुचि नहीं दिख रही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के मंदिरों के विकास के लिए तीन हजार करोड़ रुपये का फंड जारी किया था, लेकिन उनका आरोप है कि आनंदेश्वर कॉरिडोर में इस राशि का दुरुपयोग हुआ। उन्होंने कहा कि घाट का सुंदरीकरण नहीं किया गया और सड़क निर्माण भी अधूरा है। महाराज ने बताया कि वह इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से बातचीत करेंगे।
शंकराचार्य मामले पर नारायण गिरी महाराज ने कहा कि संतों के बीच आरोप-प्रत्यारोप दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्होंने इसे समाजवादी मानसिकता वाले लोगों की कोशिश करार दिया, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रधानमंत्री पद की छवि को प्रभावित करना चाहते हैं।
इस अवसर पर महाराज ने बाबा आनंदेश्वर महादेव का अभिषेक और मां गंगा का पूजन किया। दोपहर को उन्होंने आनंदेश्वर कॉरिडोर का निरीक्षण किया और जूना अखाड़े के गुरुओं के साथ बैठक कर कॉरिडोर से जुड़े कार्यों पर चर्चा की। बैठक में महंत महाकाल गिरी, इच्छा गिरी, अत्रीवन, जूना अखाड़ा मीडिया प्रभारी आशुतोष कुमार अंश, पंचमुखी हनुमान मंदिर पनकी के महंत कृष्ण दास महाराज, पूर्व पार्षद कीर्ति अग्निहोत्री और अजय पुजारी मौजूद रहे। शाम चार बजे नारायण गिरी महाराज दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
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