नेपाल भारत से मांगेगा बड़ा सहायता पैकेज, नवंबर में दिल्ली आ सकते हैं PM बालेन्द्र शाह

HIGHLIGHTS
- नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के 22 या 23 नवंबर को नई दिल्ली पहुंचने की संभावना है।
- नेपाल बाढ़ से हुए नुकसान के बाद पुनर्निर्माण के लिए बड़े वित्तीय पैकेज की मांग करेगा।
- नेपाल सरकार कम शर्तों वाली आर्थिक सहायता चाहती है, ताकि परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जा सके।
नेपाल के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की प्रस्तावित नई दिल्ली यात्रा के दौरान नेपाल भारत से बड़े सहायता पैकेज की मांग कर सकता है। यह दौरा नवंबर के आखिरी दिनों में होने की संभावना है। हालांकि, नेपाल और भारत की ओर से अभी तक यात्रा की तारीख की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, शाह 22 या 23 नवंबर को नई दिल्ली पहुंच सकते हैं। वहीं, प्रधानमंत्री की प्रेस सलाहकार दीपा दहाल ने मीडिया को बताया कि प्रधानमंत्री के नवंबर के अंतिम दिनों में भारत जाने की संभावना है। हालांकि, उनकी यात्रा कितने दिनों की होगी, इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है।
विदेश मंत्रालय ने क्या जानकारी दी?
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने अभी तक भारतीय पक्ष को यात्रा की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई है। पांच मार्च को हुए संसदीय चुनावों के बाद 27 मार्च को नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले बालेन्द्र शाह को भारत की ओर से नई दिल्ली आने का निमंत्रण दिया गया था।
अब तक शाह केवल एक विदेश यात्रा पर गए हैं। सितंबर में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क का दौरा किया था।
उनकी प्रस्तावित भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब नेपाल 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के प्रभावों से उबरने की कोशिश कर रहा है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के अनुसार, इस बाढ़ में करीब 1,500 लोगों की मौत हुई, जबकि 5,000 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।
भारत से नेपाल को क्या चाहिए?
भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में आई बाढ़ से कई बस्तियां, जलविद्युत संयंत्र, सड़कें और पुल बह गए। इस आपदा के कारण अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है और प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर वित्तीय संसाधनों की जरूरत है।
नेपाल के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि पुनर्निर्माण के लिए भारी धनराशि की आवश्यकता है, लेकिन नेपाल बाढ़ आने से पहले ही भारत से बड़े सहायता पैकेज की मांग करने की तैयारी कर रहा था।
हालांकि, अधिकारी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि नेपाल भारत से कितनी राशि की मांग करेगा। उन्होंने कहा कि नेपाल सरकार ऐसी वित्तीय सहायता चाहती है, जिसमें शर्तें कम हों। इससे परियोजनाओं को आसानी से और तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी तथा कम समय में उनके नतीजे सामने आ सकेंगे।
भारत नेपाल को अपने बजट के तहत नियमित सहायता देने के अलावा लाइन ऑफ क्रेडिट (LoC) के माध्यम से भी वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराता है। इसमें 2015 के भूकंप के बाद पुनर्निर्माण के लिए दी गई सहायता भी शामिल है। उस समय भारत ने नेपाल को 1 अरब अमेरिकी डॉलर देने का वादा किया था, जो लगभग 9,506 करोड़ रुपये के बराबर है।
भारतीय दूतावास की वेबसाइट पर क्या जानकारी है?
भारतीय दूतावास की वेबसाइट के मुताबिक, नेपाल में फिलहाल चार लाइन ऑफ क्रेडिट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इनकी राशि क्रमशः 100 मिलियन, 250 मिलियन, 550 मिलियन और 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। इन सभी को मिलाकर कुल राशि 1.65 अरब अमेरिकी डॉलर होती है, जो लगभग 15,669.31 करोड़ रुपये के बराबर है।
वेबसाइट के अनुसार, इन ऋण सुविधाओं का इस्तेमाल नेपाल सरकार की प्राथमिकता वाली बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं के लिए किया जा रहा है। यह वित्तीय सहायता एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ऑफ इंडिया (एक्जिम बैंक) के माध्यम से दी जाती है। इसके तहत इस्तेमाल होने वाले कुछ सामान और सेवाएं भारत से खरीदना जरूरी होता है।
विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि नेपाल भारत से बड़े वित्तीय पैकेज की अपेक्षा कर रहा है। इसके साथ ही वह लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवादों के समाधान और ऊर्जा, व्यापार, पारगमन तथा हवाई सेवाओं के क्षेत्रों में भी ठोस प्रगति चाहता है।
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