कोयला ब्लॉक आवंटन मामला, पूर्व PM मनमोहन सिंह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने बंद किया केस

HIGHLIGHTS
- सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़े कोयला ब्लॉक आवंटन मामले को बंद कर दिया।
- अदालत ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए स्पेशल कोर्ट के समन आदेश को रद्द कर दिया।
- मामला 2005 के ओडिशा तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ा था, जिसमें CBI ने आपराधिक साजिश नहीं मिलने की बात कही थी।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़े कोयला ब्लॉक आवंटन मामले को पूरी तरह समाप्त कर दिया। शीर्ष अदालत ने स्पेशल कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें डॉ. सिंह और अन्य आरोपियों को तलब किया गया था। इसके साथ ही सीबीआई की उस क्लोजर रिपोर्ट को भी स्वीकार कर लिया गया, जिसमें डॉ. मनमोहन सिंह को क्लीन चिट दी गई थी।
ट्रायल कोर्ट का आदेश किया रद्द
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने की। पीठ ने सीबीआई की ओर से दाखिल दोनों क्लोजर रिपोर्ट को सही ठहराया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के पास सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और डॉ. मनमोहन सिंह को समन जारी करने का पर्याप्त आधार नहीं था। अदालत ने कहा कि जांच के बाद यह स्पष्ट है कि सीबीआई की रिपोर्ट प्रक्रिया के अनुसार सही थी। ऐसे में मामले को आगे चलाने का कोई औचित्य नहीं है।
2005 के तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ा मामला
यह मामला साल 2005 में ओडिशा के तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक के आवंटन से संबंधित है। उस समय डॉ. मनमोहन सिंह के पास कोयला मंत्रालय का भी प्रभार था।
सीबीआई ने जांच के बाद इस मामले में किसी आपराधिक साजिश के सबूत नहीं पाए थे और क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। हालांकि, स्पेशल कोर्ट ने सीबीआई की रिपोर्ट को खारिज कर दिया था।
स्पेशल कोर्ट ने मार्च 2015 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारख समेत तीन अन्य लोगों को आरोपी के रूप में तलब किया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी थी।
मनमोहन सिंह ने फैसले में आपराधिक मंशा से किया था इनकार
डॉ. मनमोहन सिंह ने शुरुआत से ही अपने फैसले में किसी भी तरह की आपराधिक मंशा से इनकार किया था। उनका कहना था कि कोयला ब्लॉक आवंटन का निर्णय प्रशासनिक प्रक्रिया और तय नीति के अनुसार लिया गया था।
उन्होंने लोक सेवकों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए जरूरी कानूनी अनुमति (संस्वीकृति) नहीं होने का मुद्दा भी उठाया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद इस पूरे मामले पर अब पूरी तरह विराम लग गया है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.


























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.