सुप्रीम कोर्ट से एल्विश यादव को राहत, स्नेक वेनम मामले की एफआईआर रद्द

यूट्यूबर एल्विश यादव को 2023 के चर्चित स्नेक वेनम केस में बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। यह मामला नोएडा में कथित रेव पार्टी में सांप के जहर के इस्तेमाल के आरोपों से जुड़ा था।
क्या था पूरा मामला
नवंबर 2023 में नोएडा में आयोजित एक कथित पार्टी में सांपों और उनके जहर के इस्तेमाल के आरोप सामने आए थे। इस मामले में एल्विश यादव के खिलाफ केस दर्ज किया गया और मार्च 2024 में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। आरोप था कि पार्टियों में मनोरंजन और नशे के लिए सांपों का उपयोग किया जा रहा था, जो वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत गंभीर अपराध है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा था कि लोकप्रिय व्यक्तियों द्वारा जानवरों, खासकर सांप जैसे जीवों का इस तरह उपयोग करना समाज में गलत संदेश दे सकता है। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया था कि क्या किसी को जानवरों के साथ इस तरह व्यवहार करने की अनुमति दी जा सकती है।
बचाव पक्ष की दलील
एल्विश यादव की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि वह एक वीडियो शूट के लिए गायक फाजिलपुरिया के निमंत्रण पर कार्यक्रम में पहुंचे थे। उन्होंने दलील दी कि न तो रेव पार्टी के ठोस सबूत हैं और न ही नशीले पदार्थों के इस्तेमाल के प्रमाण मिले हैं।
इसके अलावा, लैब रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि मौके से बरामद किए गए सांप विषैले नहीं थे और एल्विश यादव घटनास्थल पर मौजूद भी नहीं थे।
राज्य पक्ष का तर्क
राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि पुलिस ने मौके से नौ सांप बरामद किए थे, जिनमें पांच कोबरा शामिल थे। साथ ही, सांप के जहर के इस्तेमाल के संकेत मिलने का दावा भी किया गया। कोर्ट ने राज्य से यह भी पूछा था कि जहर निकालने और उसके इस्तेमाल की प्रक्रिया क्या होती है।
कोर्ट का फैसला और व्यापक असर
दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर को निरस्त कर दिया। इस फैसले से एल्विश यादव को राहत मिली है।
हालांकि, इस पूरे प्रकरण ने वन्यजीव संरक्षण, कानून के पालन और सोशल मीडिया पर प्रभावशाली लोगों की जिम्मेदारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को फिर से चर्चा में ला दिया है।
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